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Jamshedpur Good News : अभावों के आंगन में चमकी प्रत‍िभा, आप भी दें घाटश‍िला की ब‍िट‍िया श्रुत‍ि को शाबाशी

Jamshedpur : प्रतिभा न शहर की मोहताज होती है और न पैसे और साधन-सुविधाओं की. जिनमें लगन होती है, वे हर बाधा को आसान बना लेते हैं. पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के राखा कॉपर निवासी श्रुति सिंह ऐसी ही असाधारण प्रतिभा की धनी बाल वैज्ञानिक है, जिसने झारखंड के 38 हजार बच्चों में से अपने मॉडल का लोहा मनवाया है. श्रुति के पिता अशोक सिंह टेंपो चालक हैं, जो जादूगोड़ा क्षेत्र के राखा कॉपर में रहते हैं. श्रुति माटीगोड़ा के सरकारी स्कूल में पढ़ती है.
मामूली सुविधाओं वाले सरकारी स्कूल में पढ़नेवाली इस छात्रा ने वह सोच लिया, जो अत्याधुनिक सुविधाओं वाले बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़नेवाले और महंगे गैजेट रखनेवाले बच्चे नहीं सोच पाते. श्रुति ने दिव्यांगों के लिए एक ऐसे स्ट्रेचर का मॉडल तैयार किया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर भी मरीजों को बिना किसी झटके और परेशानी के ले जायेगा. साथ ही इस स्ट्रेचर से मरीज को सीढ़ियों से भी चढ़ाया जा सकेगा. यही नहीं, जरूरत पड़ने पर इस स्ट्रेचर को व्हीलचेयर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
बीआईटी मेसरा में 22-23 मार्च को हुआ कार्यक्रम
रांची स्थित बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा में राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान, भारत की ओर से झारखंड के विभिन्न जिलों से चयनित 8 बाल वैज्ञानिकों के मॉडलों को तराशने तथा उत्कृष्टता प्रदान करने के लिए 22-23 मार्च को आयोजित दो दिवसीय मेंटरशिप कार्यशाला में श्रुति के मॉडल की काफी सराहना हुई. मुख्य अतिथि एवं जजों ने श्रुति से उसके मॉडल के बारे में जानकारी ली तथा इसे और बेहतर बनाने के टिप्स दिये. श्रुति राज्य स्तर पर चयनित उन 8 बाल वैज्ञानिकों में शामिल है, जो राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे. इस मेंटरशिप वर्कशॉप का आयोजन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना इंस्पायर अवार्ड मानक स्कीम के संपूर्ण क्रियान्वयन को लेकर किया गया था.
समारोह में श्रुति को पुरस्कृत भी किया गया
कार्यशाला की समाप्ति के बाद 24 मार्च को आयोजित समारोह में श्रुति और अन्य बाल वैज्ञानिकों को पुरस्कृत भी किया गया. उसे एक ट्रॉफी और प्रमाण पत्र दिया गया. श्रुति के पिता अशोक सिंह ने बताया कि साल 2020 में झारखंड के हर सरकारी स्कूल से दो बाल वैज्ञानिकों का चयन किया गया था. पहले दौर में पूरे राज्य से कुल 38 हजार बच्चे चुने गये थे. दूसरे दौर में इन 38 हजार में से 900 बच्चों को चुना गया. तीसरे दौर तक मात्र 121 बच्चे ही बच गये. अंतिम दौर में इनमें से मात्र 8 बाल वैज्ञानिकों राज्य स्तर पर चुना गया, जो राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे. इन बाल वैज्ञानिकों के मॉडलों को अब विशेषज्ञों के साथ काम करके राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी जायेगी.
बेटी ने गर्व से सिर ऊंचा किया
श्रुति के पिता अशोक सिंह अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि बेटी ने उनका और परिवार का नाम रोशन किया है. गर्व से उनका सिर ऊंचा हो गया है. अशोक भले ही परिवार के भरण-पोषण के लिए टेंपो चलाते हैं, लेकिन उनका कहना है कि बेटी जिनता पढ़ना चाहे, वे पढ़ायेंगे और उसके सपनों को पूरा करने के लिए जो भी संभव होगा, करेंगे.

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