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पाकुड़, पलामू, देवघर, लातेहार और धनबाद में पुलिस कप्तान का औसत कार्यकाल महज एक साल

राज्य बनने के बाद अब तक 22 एसपी बदले गये पाकुड़ में

Chandi Dutta Jha

Ranchi : राज्य में आइपीएस अफसरों के तबादलों में न्यूनतम दो साल के कार्यकाल के मानक को पूरा नहीं किया जा रहा है. दो साल तक एक साथ काम करने के बजाय कुछ माह में ही अफसर इधर से उधर किये जा रहे हैं. आंकड़े के अनुसार राज्य गठन से अबतक 24 जिलों में 410 एसपी के तबादले किये गये. इससे आशय यह है कि एक-एक अफसरों के कई बार स्थानांतरित किये गये. झारखंड स्थापना के बाद से पाकुड़ जिले में अबतक 22 एसपी बदले गये हैं. वहीं पलामू में 21, लातेहार, देवघर व धनबाद में 20 एसपी बदले गये हैं.

वर्ष 2001 में बने नये जिले सरायकेला खरसावां में 17, सिमडेगा में 18, जामताड़ा में 17, लातेहार में 20 एसपी बदले गये हैं. वहीं वर्ष 2007 में नव निर्मित जिले खूंटी में 13 व रामगढ़ में 12 एसपी बदले गये.

इतने कम समय में एसपी के तबादले से कई तरह के काम पर भी असर पड़ता है. झारखंड के कई जिले नक्सल प्रभावित हैं तो कुछ जिलों को क्रीम माना जाता है. बताया जाता है कि आइपीएस नक्सल क्षेत्र से जल्द से जल्द तबादला करवा लेते हैं.

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क्या है नियम

केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 28 जनवरी 2014 को अखिल भारतीय सेवा नियम में संशोधन करते हुए एक पद पर कम से कम दो साल कार्य करने के लिए न्यूनतम अवधि तय किया था. केवल विशेष परिस्थिति में ही दो साल से कम अवधि में किसी अफसर का तबादला किया जा सकता है, लेकिन इस आदेश को राज्य में दरकिनार किया जा रहा है.

बता दें कि पहले एसपी का कार्यकाल तीन साल का होता था. पुलिस रिफॉर्म लागू होने के बाद एसपी का कार्यकाल न्यूनतम दो साल तय हो गया है. झारखंड पुलिस पूर्व में अधिसूचना जारी कर चुकी है. पर इस नियम का कभी पालन नहीं किया जाता है.

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पुलिस स्थापना बोर्ड नहीं है सक्रिय

पुलिस रिफॉर्म लागू होने के बाद आइपीएस के तबादले के लिए पुलिस मुख्यालय में डीजीपी की अध्यक्षता में पुलिस स्थापना बोर्ड गठित है. इस बोर्ड में डीजीपी और वरीय आइपीएस अधिकारी को शामिल किया गया है. नियम के मुताबिक इस बोर्ड की अनुशंसा के बिना कोई भी तबादला नहीं हो सकता. पुलिस रिफॉर्म में पुलिस स्थापना बोर्ड का प्रावधान इसलिए किया गया था ताकि आइपीएस अधिकारियों का तबादला राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहे.

लेकिन राज्य में जिस तरह तबादला किया जा रहा है, इससे लगता है कि पुलिस स्थापना बोर्ड सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गया है. सरकार अब भी अपनी मर्जी से तबादला कर रही है.

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कुछ अधिकारियों ने ही पूरा किया है कार्यकाल, कुछ की महीनों में विदाई

आइपीएस अधिकारी प्रिया दुबे और कुलदीप द्विवेदी ने बोकारो में दो साल पूरा किये, जबकि इसी जिले में सुजाता वीणापानी का करीब एक महीने बाद ही तबादला हो गया. धनबाद में एसपी रविकांत धान ने दो साल का कार्यकाल पूरा किया, जबकि जतीन नरवल करीब एक माह तक वहां रहे.

रामगढ़ में एसपी अमोल वेणुकांत होमकर व अनीस गुप्ता ने दो साल का कार्यकाल पूरा किया. सरायकेला जिले में लक्ष्मण प्रसाद सिंह व अभिषेक, हजारीबाग में प्रवीण कुमार सिंह व पंकज कंबोज, पाकुड़ में संपत मीणा और मो नेहाल, जमशेदपुर में नवीन कुमार सिंह व अखिलेश झा और चाईबासा में नवीन कुमार सिंह व सुधीर कुमार झा दो साल का कार्यकाल पूरा कर सके.

वहीं लोहरदगा में चन्द्रशेखर प्रसाद, गोड्डा में एसपी रहे एसपी कन्हैयालाल, देवघर एसपी रहे विपुल शुक्ला, गिरीडीह एसपी अब्दुल गनि मीर, दुमका एसपी नरेंद्र कुमार सिंह का करीब एक ही माह में तबादला हो गया.

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जिलेअब तक एसपी
कोडरमा19
गढ़वा18
गिरिडीह16
गुमला17
चतरा18
जामताड़ा17
दुमका17
देवघर20
गोड्डा17
धनबाद20
पलामू21
पश्चिमी सिंहभूम19
पूर्वी सिंहभूम12
बोकारो17
रांची15
लातेहार20
लोहरदगा15
सरायकेला-खरसावां17
साहिबगंज15
सिमडेगा18
हजारीबाग15
रामगढ़12
पाकुड़22
खूंटी13

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