
Ranchi: राज्य में गांव की सरकार कार्यकारी समिति के रूप में अपना जिम्मा निभा रही है. पिछले एक साल से वह पंचायत चुनाव की आस में है. पिछले वर्ष 2020 में मार्च महीने से वैश्विक महामारी के रूप में कोरोना का संकट खड़ा होना शुरू हो गया जो अब तक जारी है. इसे देखते राज्य सरकार नवंबर-दिसंबर में पंचायत चुनाव नहीं करा सकी. इस बीच जनवरी, 2021 में त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था का कार्यकाल भी समाप्त हो गया. इसकी जगह पर कार्यकारी समिति का गठन हुआ.
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सरकार ने उम्मीद जाहिर की कि वह जून-जुलाई तक चुनाव करा लेगी. पर इस समय तक भी ऐसा नहीं हो सका. नवंबर-दिसंबर, 2021 तक चुनाव कराए जाने का भरोसा दिलाया गया. राज्य चुनाव आयोग ने इसके लिये तैयारियां शुरू कीं. तैयारियों को अंतिम रूप दे भी दिया पर कोरोना के संभावित प्रसार के कारण एक बार चुनाव प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ा. अब अगले साल ही चुनाव संभव है.
सदन में क्या कहा सरकार ने
विधायक लंबोदर महतो ने सरकार से विधानसभा सत्र के दौरान पूछा था कि क्या राज्य में पंचायत चुनाव कराने को चुनाव आयोग ने सरकार के पास अपना अनुमोदन दो माह पूर्व भेज दिया था तथा यह लंबित रखा गया है और पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहे हैं? क्या सरकार शीघ्र अनुमोदन के साथ पंचायत चुनाव यथाशीघ्र कराना चाहती है? पंचायती राज विभाग ने इस बात को माना कि चुनाव आयोग की ओऱ से तैयारी पूरी थी. उसने दो माह पहले अपना अनुमोदन सरकार के पास भेज दिया था. पर छठ महापर्व के बाद कोरोना संक्रमण के खतरे को देख अनुमोदन नहीं किया गया.
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राज्य निर्वाचन आयोग के ज्ञापांक 1323, दिनांक 29.11.2021 को बताया गया है कि सभी जिलों में निर्वाचन की तैयारी पूर्ण है. पंचायती राज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार तत्समय विधानसभा निर्वाचन हेतु प्रवृत्त मतदाता सूची का उपयोग किया जायेगा. अभी मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चल रहा है. 5 जनवरी, 2022 तक इसका प्रकाशन कर दिया जायेगा. जिलों में इसका प्रकाशन 10 फरवरी, 2022 तक कर दिया जाएगा. इसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढेगी.
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दो-दो बार एक्सटेंशन
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश सहित अन्य नेता बार बार आरोप लगाते रहे हैं कि कार्यकारी समिति को दो-दो बार एक्सटेंशन देना साजिश है. गांव की सरकार जिस तरह से गांव के विकास का काम कर सकती है, वह समिति से संभव नहीं. समिति के जरिये सरकार ग्रामीण विकास के कामों में भी कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लगी है.
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राज्य में पिछले दो सालों में तीन-तीन उपचुनाव हो गए. दुमका, गोमिया और मधुपुर में राज्य सरकार ने कोरोना खतरे के बीच भी चुनाव करा लिए. पड़ोसी राज्य बिहार में अभी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते पंचायत चुनाव संपन्न हो गए. पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्य में भी विधानसभा के चुनाव हो गए. पर महज कोरोना की आड़ में झारखंड में पंचायत चुनाव को टालना समझ से परे है.
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