
Nikhil kumar
Ranchi: राज्य के सरकारी स्कूलों में नौंवी क्लास में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को इस साल साइकिल मिलेगी. ये वे छात्र-छात्राएं हैं जिन्हें सरकार की ओर से पिछले वर्ष साइकिल नहीं मिल पाया था और वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे. राज्य सरकार ने इन छात्र-छात्राओं को अब साइकिल देने का निर्णय लिया है. हालांकि, इस साल आठवीं में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए भी अलग से साइकिल देने के लिए राशि का प्रावधान किया जायेगा. अनूसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़ा वर्ग,अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से राज्य की छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल देने के लिए 122 करोड़ का टेंडर जारी किया है. मिली जानकारी के अनुसार इस साल करीब 3.49 लाख साइकिल की खरीद की जायेगी.
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हालांकि,विभाग ने करीब तीन लाख छात्र-छात्राओं को प्रारंभ में साइकिल देने का लक्ष्य रखा था,लेकिन जिलों से प्रस्ताव आने के बाद यह बढ़कर करीब 3.49 लाख तक पहुंच गया. विभाग ने बिड के जरिये करीब प्रति साइकिल 4500 रुपये की दर निर्धारित की है. यह व्यवस्था की गयी है कि इस बार सिर्फ एल वन होने मात्र से ही साइकिल की खरीद किसी कंपनी से नहीं की जायेगी, बल्कि यह देखा जायेगा कि साइकिल मानक के अनुरूप कंपनी उपलब्ध कराती है कि नहीं. विभाग ने यह तय किया है कि स्पोक,पैडल सहित अन्य पार्टस साइकिल के बेहतर होने चाहिए साथ ही कम से कम 18.5 किलो के वजन का साइकिल होना अनिवार्य है.
इसके अलावा भी कई शर्त और कंपनी का टर्नओवर,उत्पादन की क्राइटेरिया को पूरा करना है. अगर विभाग की शर्त पर कंपनी खरी नहीं उतरती है तो रिवर्स ऑक्सन का भी विकल्प रखा गया है. सूत्रों के अनुसार साइकिल के टेंडर में देश बड़ी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है.
पहले डीबीटी से पैसा भेजा जाता था
बता दें कि,विगत सालों में सरकार ने साइकिल के बजाए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से छात्र-छात्राओं के खाते में सीधे राशि भेज देती थी. यह मानना था कि अपनी पंसद से वे साइकिल की खरीद कर सकेंगे. साथ ही बिड प्रोसेस में होने वाली गड़बड़ी की शिकायतों से भी बचा जा सकेगा. प्रति छात्र 3500 रुपये खाते में साइकिल के लिए दिए जाते थे, लेकिन देखा जा रहा था कि वे समय पर साइकिल नहीं खरीद पा रहे थे. पर इस बार हेमंत सरकार ने व्यवस्था बदलते हुए आठवीं क्लास के सभी छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल देने का निर्णय लिया है,ताकि वे साइकिल के अभाव में दुरस्थ स्कूलों में शिक्षा पाने से वंचित न हो सकें.




