
- झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में सरना आदिवासी धर्मकोड पर राजनीति करने के आरोप पर हेमंत ने दिया जवाब
Ranchi : झारखंड विधानसभा ने सरना आदिवासी धर्मकोड लागू करने को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया. पहले सरकार के संकल्प संख्या 4242 के तहत आदिवासी/सरना धर्मकोड के नाम से प्रस्ताव भेजा जाना था, पर चर्चा के बाद संशोधन कर सरना आदिवासी धर्मकोड के नाम से प्रस्ताव भेजा जायेगा. चर्चा के दौरान भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि मुझे शक है, यह षड्यंत्र लग रहा है. सब ठीक है, पर सरकार आदिवासी और सरना के बीच में ऑब्लिक(/) लगाकर राजनीति कर रही है.
इसके अलावा भाजपा के कई सदस्यों ने राजनीति करनेवाली बात दोहरायी. इस पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि सदन में जहां प्रस्ताव रखा गया है, सभी सदस्य इसकी गंभीरता को समझते हैं. वहां राजनीति नहीं होनी चाहिए, पर जहां (सदन में) इतने सारे राजनीतिक दल बैठते हों, वहां राजनीति न हो, यह कैसे संभव है. उन्होंने कहा कि हम लाठी के बल पर सरकार नहीं चलाना चाहते और प्रस्ताव में संशोधन कर रहे हैं और सरना आदिवासी धर्मकोड की मांग को लेकर केंद्र को प्रस्ताव भेजा जायेगा, जिसके बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया.
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सीपी सिंह ने सीएम से पूछा- जिन्होंने सरना आदिवासी धर्मकोड को हटाया, उनके साथ गलबंहिया कितना उचित
चर्चा के दौरान कई बार ये बातें कही गयीं कि 1951 तक जनगणना के कॉलम में आदिवासियों के लिए धर्मकोड का कॉलम था. उसे 1961 में हटा दिया गया था. इस पर भाजपाइयों ने बार-बार पूछा कि 1961 में किसकी सरकार थी. इसी पर सीपी सिंह ने सीएम से पूछा कि आखिर जिन्होंने आदिवासियों के धर्मकोड को हटाया, उनके साथ गलबंहिया कितना उचित है.
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कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को सरना धर्मकोड पर बोलने का कोई अधिकार नहीं : नीलकंठ
चर्चा के दौरान कहा गया कि जब 1961 में जनगणना से आदिवासियों के कॉलम को हटाया गया, तब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे और कांग्रेस की सरकार थी. इसके अलावा नीलकंठ सिंह मुंडा ने सदन में कहा कि 2005 में हमारी सरकार ने जाति प्रमाणपत्रों में सरना कॉलम जोड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसे 2006 में यूपीए की सरकार ने हटा दिया था. फिर 2014 में हमारी सरकार आने के बाद इसे लागू किया गया. इसलिए, कांग्रेस के लोगों को सरना धर्मकोड पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है.
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