
Patna : बिहार चुनाव में राजद सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन तेजस्वी यादव सीएम पद से दूर रह गये. उनकी राह का रोड़ा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी बन गये. जान लें कि बिहार के सीमांचल में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने महागठबंधन का खेल खराब कर दिया. और तेजस्वी बिहार का सीएम बनने से रह गये.
चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की. औवैसी की यह जीत तेजस्वी यादव और महागठबंधन के लिए घातक साबित हुई.
सीमांचल की 24 सीटों में से एनडीए को आधी सीटों पर सफलता मिली
सीमांचल की 24 विधानसभा सीटों में से एनडीए को करीब आधी सीटों पर सफलता मिली. जबकि, महागठबंधन उम्मीद से कम सीटों पर कामयाबी मिली है. इसके अलावे ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को भी अच्छी सफलता मिली. इन सबके बीच कई सीटों पर ओवैसी भले ही जीतते नजर नहीं आये, लेकिन उनके प्रदर्शन से महागठबंधन का खेल जरूर बिगाड़ दिया. जान लें कि एआईएमआईएम ने बिहार की 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिनमें से 14 उम्मीदवार सीमांचल इलाके की सीटों अपनी किस्मत आजमा रहे थे.
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राजद को 75, कांग्रेस को 19 और लेफ्ट को 16 सीटें
जान लें कि महागठबंधन की लीडर राजद को 75, कांग्रेस को 19 और सहयोगी लेफ्ट को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई है. एनडीए की ओर से भाजपा को 74 सीटें जदयू को 43 और अन्य सहयोगी दल वीआईपी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 4-4 सीटें मिली हैं.
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कांग्रेस ने निराश किया
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के साथ महागठबंधन के तहत 70 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को 19 सीटों पर ही कामयाबी मिली है. यानी उसका स्ट्राइक रेट उसकी अपनी उम्मीदों से काफ़ी नीचे है.
अगर बिहार की राजनीति में हाल के दशकों में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखा जाये तो ये बहुत हैरान करने वाली बात नहीं है.2015 के चुनावों में कांग्रेस ने राजद और जदयू के साथ महागठबंधन के तहत 41 सीटों पर चुनाव लड़ा और 27 सीटें जीतीं थीं
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