
- नौवीं से 12वीं तक के छह लाख बच्चों को मिलेगा लाभ
अनुज तिवारी
Ranchi: झारखंड के स्कूली बच्चों की ऑनलाइन क्लास अब और आसान करने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल की है. खासकर के कक्षा नौवीं से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए अब ऑनलाईन ई-पुस्तक मिल सकेंगी. इस पहल के बाद सूबे के करीब छह लाख छह लाख बच्चों को इसका लाभ मिल सकेगा.
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वीडियो क्लीप से भी हर चैप्टर को गया है समझाया
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग इसे लेकर एक एप लर्नेटिक्स लांच करने जा रहा है. इस लर्नेक्सि एप में हर विषय के लिए अगल-अलग शिक्षकों द्वारा हर चैप्टर को बारीकी से समझाने का प्रयास किया गया है. लर्नेटिक्स में छात्रों को वीडियो क्लीप से भी हर चैप्टर को समझाया गया है. इसमें खासकर के एनसीईआरटी पुस्तकों व इसके वीडियो को देखने व समझने के लिए डाला गया है.
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लॉकडाउन की वजह से 60 प्रतिशत पढ़ने वाले सिलैबस होंगे हाईलाईटेड
कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हो गये हैं. इसके बाद विभाग ने सिलेबस कम किया है. इसके लिए एप में ऐसी सुविधा दी गई है कि 60 प्रतिशत सिलेबस पढ़ना है उसे हरे रंग से हाईलाईटेड किया जाएगा.
हालांकि बच्चे अपनी जानकारी व जिज्ञासा शांत करने के लिए कम किये गये 40 प्रतिशत सिलेबस को भी पढ़ सकते हैं लेकिन इससे बोर्ड परीक्षा में प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे. इसके अलावे बच्चों को कोई भी जानकारी चाहिए तो वो ऑनलाइन अपने सवाल भेज सकते है जिसकी जानकारी सरकारी स्कूलों के संबंधित शिक्षकों को देनी होगी.
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सिलेबस से संबंधित पांच हजार प्रश्न हल कर सकते हैं विद्यार्थी
एप लर्नेटिक्स में बच्चों को हर विषय की अच्छी जानकारी मिले इसे लेकर हर विषय से हजारों प्रश्न डाले गए हैं. बताया जा रहा है कि हर विषय से एक-एक हजार प्रश्नों की संख्या होगी, जिसे हल कर बच्चे अपने आप को बेहतर बना सकेंगे.
इसके अलावा हर गलत उत्तर की जानकारी भी मौजूद रहेगी, जिसे समझाने के लिए उस प्रश्न के उत्तर की जानकारी बारीकी से दी गई हैं साथ ही एक प्रश्न के उत्तर के लिए दर्जनों वीडियो भी डाले गए हैं. जिससे समझने में कोई परेशानी ना हो सके.
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एनसीईआरटी पुस्तक नहीं मिलने वाली परेशानी भी होगी दूर
बच्चों को एनसीईआरअी की पुस्तक नहीं मिलने वाली परेशानी अब दूर हो सकेगी. अभी भी स्कूलों में पुस्तक उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. खास कर के अभी के सत्र में नयी कक्षा में जाने के बाद भी 60 प्रतिशत से अधिक बच्चों को बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तक नहीं मिल पा रही है.
ऐसे में यह ऐप बच्चों के लिए वरदान साबित होगा. इसमें हर विषय के पुस्तक मौजूद रहेंगी. सरकारी स्कूल के बच्चों के अलावा निजी स्कूलों के बच्चों को भी इस ऐप से मदद मिल सकेगी, लेकिन उनके लिए कई मापदंड को पूरा करना पड़ सकता है.
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