
Ranchi: साल 2016 में पूर्व सरकार ने पंचायत सचिवालय स्वयं सेवकों की बहाली की. जिन लोगों को प्रोत्साहन राशि के नाम पर बहाल किया गया, दो साल से उन्हें उनका मेहनताना भी नहीं मिला है. पंचायत सचिवालय स्वयं सेवकों की नियुक्ति पूर्व सरकार ने प्रोत्साहन राशि के नाम पर की.
लेकिन साल 2018 से इनकी प्रोत्साहन राशि रूकी हुई है. जबकि राज्य में इनकी संख्या 17 हजार 735 है. बता दें ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत इनकी नियुक्ति की गयी थी. पंचायत स्वयं सेवकों ने कई बार पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विभागीय मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखी थी. वहीं पिछले दो साल से लगातार स्वयं सेवकों ने आंदोलन किया. इसके बाद भी इन्हें इनका बकाया भुगतान नहीं किया गया. अगर इनके प्रोत्साहन राशि की बात करें, तो अलग-अलग योजनाओं के तहत इन्हें दस रूपये से लेकर पंद्रह हजार तक दिया जाता है.
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किन योजनाओं से कितना मिलता है
एक प्रधानमंत्री आवास योजना पूरी करने में इन्हें 1200 रूपये मिलते हैं. वहीं अगर नौ महीने से अधिक समय आवास पूरा होने में लगता है तो राशि की कटौती की जाती है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ घोषित पंचायत पर उस क्षेत्र के स्वयं सेवक को 15 हजार रूपये मिलते, राशन कार्ड बनाने में दस रूपये, राशन कार्ड से नाम हटाने पर 20 रूपये, वृद्धा और विधवा पेंशन देने में दस रूपये, किसी भी तरह के सर्वे एक परिवार में करने पर 20 रूपये और कृषि सर्वे पर 50 रूपये मिलते हैं. बता दें पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के पहले कई स्वयं सेवकों ने सरकार के लिये काम करना छोड़ दिया.
40 हजार से डेढ़ लाख तक बकाया
राज्य स्तरीय पंचायत सचिवालय स्वयंसेवक संघ के अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार से इस मामले में बात की गयी. उन्होंने बताया कि 17 हजार 735 पंचायत सचिवालय स्वयं सेवकों को पूर्व सरकार ने बहाल तो किया. लेकिन इन्हें प्रोत्साहन राशि तक नहीं दे पायी सरकार. अब इनका बकाया अधिक हो गया है. कुछ ने तो काम भी छोड़ दिया.
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चंद्रदीप कुमार ने बताया कि एक-एक पंचायत स्वयं सेवकों के पास सरकार का बकाया लगभग 40 हजार से डेढ़ लाख तक है. अलग-अलग समय में आंदोलन करके इसकी जानकारी दी गयी. लेकिन फिर भी भुगतान नहीं किया.
मॉनिटरिंग सेल तक नहीं
स्वयं सेवकों से बात करने से जानकारी मिली की बहाली के साथ ही पूर्व सरकार ने इनके लिये अलग से मॉनिटरिंग सेल गठित करने की बात की थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग सेल नहीं होने से इनके कामों का मूल्यांकन और इनके भुगतान का ब्यौरा नहीं रहता. स्वयं सेवकों पिछले दो साल से लगातार अपने स्थायीकरण और उचित मानदेय की मांग कर रहे हैं. कुछ ने बताया कि अब इनके समक्ष भूखे मरने की स्थिति हो गयी है.
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