
New Delhi: बीते कुछ दिनों में देश में महिला सुरक्षा और पुलिस के लापरवाह रवैये को लेकर सवाल उठे हैं. खास कर के हाथरस कांड और उसमें यूपी पुलिस की लापरवाही को लेकर देश में उबाल देखा गया. लोगों ने एक सुर में पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की और लापरवाह पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग ने भी जोर पकड़ा. इन परिदृश्यों के बीच गृह मंत्रालय ने महिला सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है. जिसमें रेप केस में पुलिसवालों के लिए कार्रवाई करना अनिवार्य किया गया है.
इसे भी पढ़ेंः आज से ट्रेन छूटने से 5 पांच मिनट पहले भी बुक करा सकेंगे टिकट
रेप केस में एफआइआर जरूरी
अक्सर देखा गया है कि रेप केस में किसी भी राज्य की पुलिस जल्द एफआइआर दर्ज नहीं करती. मामला दर्ज भी होता है तो देर से मेडिकल कराने और कमजोर धाराओं के कारण केस कमजोर हो जाता है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
Ministry of Home Affairs issues advisory to States and Union Territories for ensuring mandatory action by police in cases of crime against women. pic.twitter.com/dx1sQmzXLW
— ANI (@ANI) October 10, 2020
अब रेप की पीड़िता को केस दर्ज कराने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. क्योंकि महिला सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नयी एडविजरी जारी की है. जिसमें राज्यों और केंद्रशास्ति प्रदेशों को विशेष निर्देश दिये गये हैं. इसके तहत कोई भी पुलिस रेप केस को दर्ज करने में कोताही नहीं कर सकती. ऐसे मामलों में एफआइआर करना अनिवार्य कर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने कहा कि सीआरपीसी के तहत संज्ञेय अपराधों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.
इसे भी पढ़ेंः Corona Update: 24 घंटे में 73 हजार से अधिक नये केस, 9 लाख से कम एक्टिव मरीज
क्या है नयी एडवाइजरी में
- सीआरपीसी के तहत संज्ञेय अपराधों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए. अगर अपराध थाना की सीमा क्षेत्र के बाहर हुआ तो भी कानूनन पुलिस को ‘जीरो प्राथमिकी’ और प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार देता है.
- आइपीसी की धारा 166 A(c) के तहत, प्राथमिकी दर्ज न करने पर अधिकारी को सजा का प्रावधान है.
- सीआरपीसी की धारा 173 में रेप से जुड़े केस की जांच दो महीनों में करने का प्रावधान है. गृह मंत्रालय ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां से मामलों की मॉनिटरिंग हो सकती है.
- सीआरपीसी के सेक्शन 164-A के अनुसार, रेप/यौन शोषण की मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़िता की सहमति से एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल जांच करेगा.
- इंडियन एविडेंस ऐक्ट की धारा 32(1) के अनुसार, मृत व्यक्ति का बयान जांच में अहम तथ्य होगा.
- फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्टोर करने की गाइडलाइंस बनाई हैं. उनका पालन हो.
- अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्याय नहीं हो पाएगा. अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
इसे भी पढ़ेंः Corona Update: 24 घंटे में 73 हजार से अधिक नये केस, 9 लाख से कम एक्टिव मरीज




