
Ranchi: दूरसंचार की सेवा देने वाली सरकार की सबसे बड़ी कंपनी बीएसएनएल के प्रति सरकार का रवैया उदासीन है. यही वजह है कि 10 माह बीत जाने के बाद भी बीएसएनएल अब तक 4जी की सुविधा नहीं शुरू कर पाया है. इतना ही नहीं कर्मचारियों के प्रति भी बीएसएनएल का रूख उनके हित में नहीं है. कर्मचारियों पर होने वाले खर्च से तीन गुना अधिक प्रतिमाह कमाई होने के बाद भी बीएसएनएल अपने कर्मचारियों को सैलेरी देने में देरी करता है.
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नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीफोन इंप्लॉयी का विरोध-प्रदर्शन
बीएसएनएल के इसी रवैये का विरोध नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीफोन इंप्लॉयी के झारखंड इकाई के सदस्यों ने किया. शहीद चौक स्थित कार्यालय समक्ष विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव महावीर सिंह ने किया. मौके पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रीमंडल के द्वारा दिसंबर 2019 में ही आदेश दिया था कि बीएसएनएल को जल्द ही 4जी सेवा शुरू करने दिया जायेगा. लेकिन 10 माह बीत जाने के बाद भी बीएसएनएल को ऐसा करने का अवसर नहीं मिला.
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सरकार का यह रवैया साफ करता है कि वह निजी ऑपरेटर को फायदा पहुंचाना चाहती है. फेडरेशन ने चेतावनी भी दी कि अगर 4जी सेवा जल्द शुरू नहीं करने दिया गया तो वृहद रूप में आंदोलन किया जायेगा. गौरतलब है कि देशभर में बीएसएनल के 30 हजार कर्मचारी और 35 हजार अधिकारी यानी कुल 65 हजार इंप्लॉयी हैं. जनवरी 2020 में 78 हजार कर्मचारियों ने वीआरएस लिया.
बीएसएनएल को वर्तमान में 1400 करोड़ रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है. जबकि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए केवल 365 करोड़ रुपये की जरूरत है. इसके बाद भी कंपनी अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देती है. कर्मचारियों को एक माह के वेतन के लिए डेढ़ महीने का इंतजार करना पड़ रहा है.
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