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बेरमो उपचुनाव: कांग्रेस कैंडिडेट पर संशय, बोकारो जिला अध्यक्ष से 3 अक्टूबर तक मांगी गयी इच्छूक उम्मीदवारों की सूची

3 नवंबर को होना है मतदान, 10 को आएगा रिजल्ट

Ranchi: बेरमो और दुमका विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 3 नवबंर को होगा. वहीं 10 नवंबर को चुनावी नतीजे आएंगे. चुनावी तिथि की घोषणा के बाद दोनों ही सीटों पर आचार संहिता लागू हो गयी है. इस बीच दुमका सीट के लिए उम्मीदवार का नाम फाइनल माना जा रहा है. न्यूज विंग ने पिछले दिनों यह खबर चलायी थी कि यहां से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई और युवा जेएमएम नेता बसंत सोरेन उम्मीदवार होंगे.

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वहीं बेरमो सीट से कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, इसपर अभी तक संशय बरकरार है. बेरमो सीट से छह बार विधायक रहे दिवंगत नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह के बेटे तो चुनावी रेस में ही है. इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने बोकारो जिला अध्यक्ष से चुनाव लड़ने वाले इच्छुक उम्मीदवारों की सूची मांगी है. सूची मिलने के बाद प्रदेश नेता दिल्ली नेतृत्व को नामों की सूची भेजेंगे. उसके बाद उम्मीदवार के नाम की अधिसूचना दिल्ली नेतृत्व जारी करेगा.

5 अक्टूबर के बाद ही आएगा उम्मीदवार का नाम सामने

बेरमो उपचुनाव की तैयारी और उम्मीदवार के नाम को लेकर बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने सभी लोगों को चुनावों की तैयारी में जुट जाने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि वरिष्ठ लोगों की सूची बनाकर उपचुनाव के लिए पंचायत लेवल तक पर्यवेक्षक भेजने की पहल की जाये.

उन्होंने कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को निर्देश दिया कि आगामी 3 अक्तूबर तक बोकारो जिला अध्यक्ष से चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन लें. इन आवेदन को 5 अक्तूबर तक केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा जाएगा. डॉ उरांव के निर्देश के बाद यह तय है कि उम्मीदवार के नामों की घोषणा कांग्रेस 5 अक्टूबर को बाद ही करेगी.

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महागठबंधन की एकजुटता का मिलेगा लाभ

हालांकि, बेरमो उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के नाम की घोषणा होनी बाकी है. लेकिन माना जा रहा है कि महागठबंधन में होने का फायदा कांग्रेस पार्टी को जरूर मिलेगा. दिवंगत नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह के नाम का यहां दबदबा पहले से ही रहा है. उनके नाम और महागठबंधन दलों के सहयोग से 2019 के विधानसभा चुनाव में भी  कांग्रेस ने भाजपा को यहां बड़े अंतर से मात दी थी. यह अंतर करीब 25,000 से अधिक मतों का था. उनके निधन से खाली हुई सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को क्षेत्र के वोटरों की सहानुभूति भी मिलने की पूरी संभावना है.

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