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झारखंड में 23,000 Tour & Travel Agents पर लॉकडाउन की मार, 15% से भी अधिक एजेंसियां बंद

Ranchi : कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए राज्य में 30 सितंबर तक लॉकडाउन जारी है. हालांकि धीरे-धीरे अनलॉक की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है. पर ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटरों के लिए अब भी आगे बढ़ने का रास्ता नहीं खुल सका है. 6 महीने से जारी लॉकडाउन ने कई ऑपरेटरों के कारोबार पर ताला लगा दिया है.

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टूर एंड ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ झारखंड के मुताबिक राज्य में 23,000 के करीब ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे थे. कोरोना संकट के कारण इनमें से 15 फीसदी से अधिक ऑपरेटरों को अपना कारोबार समेटना पड़ा है. झारखंड में राज्य सरकार से निबंधित 120 टूर एंड ट्रैवल एजेंट्स में से 3 ने इस व्यवसाय को अलविदा कह दिया है. लॉकडाउन की मार से एजेंट्सों के साथ-साथ राज्य सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है.

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रांची में 5700 ट्रैवल एजेंट

टूर एंड ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ झारखंड के अध्यक्ष अमरदीप सहाय के अनुसार सिर्फ रांची में ही 5700 ट्रैवल एजेंट हैं. एसोसिएशन से 1400 सर्विस प्रोवाइडर ऑपरटेर जुड़े हुए हैं. अब सरकार अनलॉक की ओर तो है पर समस्याएं कम नहीं हुई हैं. दूसरे राज्यों से झारखंड आने पर 14 दिनों तक क्वारंटाइन होने की शर्त है. ऐसे में बाहर से टूरिस्ट आने से बचना चाहते हैं. इंटर डिस्ट्रिक्ट परिवहन सेवाओं की बाध्यता भी राज्य में है. ऐसे में होटलों में और टूरिस्ट प्लेस पर टूरिस्ट आने को तैयार नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि राज्य में हर साल 20,000 से भी अधिक टूरिस्ट झारखंड आते रहे हैं. मार्च 2019 से मार्च 2020 तक 18,000 देशी औऱ 2000 विदेशी टूरिस्ट आ चुके थे. एक टूरिस्ट ठहरने, खाने-पीने और घूमन-फिरने में औसतन 6 से 7 हजार रुपये तक खर्च करता है. इससे न सिर्फ होटल इंडस्ट्री, टूरिस्ट प्लेस, ट्रैवल एजेंसियों को लाभ मिलता है, बल्कि राज्य सरकार को भी राजस्व मिलता है. टूरिस्ट प्लेस और ट्रैवल एजेंसियों के मामले में सरकार को लचीला रुख अपनाते हुए निर्देश जारी करने चाहिए. साथ ही 2015 के बाद से ट्रैवल एजेंटों के रजिस्ट्रेशन का काम ठप है. इसे फिर से शुरू करना चाहिए.

बैंक लोन और स्टाफ का खर्च भी बना जंजाल

टूर एंड ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ झारखंड के कोषाध्यक्ष संजीव रंजन के मुताबिक एक-एक एजेंसी से लगभग 40 से 50 लोगों का गुजारा चलता है. ड्राइवर, ऑफिस स्टाफ और अन्य कामों के लिए स्टाफ रखे जाते हैं. पर लॉकडाउन के बाद से एक रुपये की भी आमदनी नहीं है. ऐसे लोगों के लिए तो और भी कठिन समय है जिन्होंने 1-2 सालों के अंदर नयी गाड़ियां लोन पर ली हैं. ऐसे में बैंक लोन, ऑफिस और स्टाफ का खर्च निकालना टेढ़ी खीर साबित हो गया है. सरकार को रिलीफ फंड से वित्तीय मदद करनी चाहिए. ब्याज मुक्त लॉन्ग टर्म लोन का लाभ भी देना चाहिए.

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क्या कहता है पर्यटन विभाग

जेटीडीसी (झारखंट टूरिज्म एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के जीएम आलोक प्रसाद के अनुसार सरकार सभी के हित पर नजर बनाए हुए है. जल्दी ही राज्य में पर्यटन और टूर एंड ट्रैवल कारोबारियों के लिहाज से कोई निर्णय लिया जायेगा. एक समिति की बैठक होगी. इसमें सभी की राय ली जायेगी और फैसला होगा.

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