
Ranchi: राज्य के डीजीपी एमवी राव के निर्देश पर पूरे राज्य में झारखंड पुलिस के द्वारा 342 कम्युनिटी किचन खोले गये थे. 31 मार्च से लेकर 30 जून तक चले झारखंड पुलिस का कम्युनिटी किचन ने 39.26 लाख लोगों का पेट भरा. कम्युनिटी किचन में हर दिन औसतन झारखंड पुलिस के द्वारा 43,623 जरूरतमंदों लोगों को भोजन कराया गया.
प्रवासियों के लिए मददगार साबित हुआ कम्युनिटी किचन
वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के देश में प्रसार के साथ ही लॉकडाउन बढ़ने के बाद पुलिस का कम्युनिटी किचन प्रवासियों के लिए काफी मददगार साबित हुआ. परिवहन बंद होने से जब प्रवासी पैदल ही विभिन्न राज्यों से अपने घरों को लौट रहे थे तब डीजीपी एमवी राव की पहल पर पुलिस के सामुदायिक किचनों को नेशनल हाईवे पर भी शिफ्ट कराया गया था. ऐसे में राहगीरों को वहां खाना खिलाया जाता था. लेकिन, अनलॉक में कम्युनिटी किचन पर निर्भरता कम हुई थी. इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों में चल रहे कम्युनिटी किचन को बंद करने का फैसला लिया.
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नक्सल प्रभावित इलाकों में भी भोजन करा रही थी झारखंड पुलिस
लॉकडाउन में राज्य के 19 नक्सल प्रभावित जिलों में गरीब, असहाय और जरूरतमंदों तक झारखंड पुलिस खाना और जरूरी सामान पहुंचा रही थी. राज्य में अति नक्सल प्रभावित इलाकों में करीब 70 पुलिस पिकेट व थाने हैं. जहां कम्युनिटी किचन शुरू कर दी गयी थी.
झारखंड पुलिस के द्वारा कोई भी व्यक्ति, कोई भी परिवार भूखा न रहे, इसका ख्याल रखा जा रहा था. गांव-गांव में यह संदेश पहुंच गया था कि राज्य सरकार की पहल पर पुलिस सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक मुफ्त में भोजन करा रही है.
किस जिले में कितने लोगों को मिला भोजन
रांची 507422, गुमला 49568, लोहरदगा 50390, सिमडेगा 166230, खूंटी 235094, जमशेदपुर 564700, चाईबासा 90814, सरायकेला 151478 पलामू 381068, गढ़वा 38786, लातेहार 98281, हजारीबाग 126105, रामगढ़ 88564, कोडरमा 30577, चतरा 36481,गिरिडीह 1607052, धनबाद 581242, बोकारो 108958, दुमका 158163, देवघर 99370,जामताड़ा 9810, गोड्डा 90798, पाकुड़ 93311 और साहिबगंज 1864 जरुरतमंदों को भोजन कराया गया.
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एक जुलाई से बंद हुआ कम्युनिटी किचन
झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सभी कम्युनिटी किचन एक जुलाई को बंद हो गये. राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया था. सभी जिलों के एसपी को पुलिस मुख्यालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि पुलिस के कम्युनिटी किचन खोले रखने की अब कोई जरूरत नहीं है.
इसलिए अब सारे किचन बंद कर दिए जाएं. आदेश में कहा गया था कि प्रत्येक सामुदायिक किचन में हुए खर्च का पूरा ब्योरा जिलों के उपायुक्त के जरिए पुलिस मुख्यालय को भी जमा कराएं. प्रत्येक कम्युनिटी किचन के संचालन के लिए कितना अनाज और कितना राशन सरकार से मिला इसका ऑडिट होगा.
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