
Saurav Singh
Ranchi: इंतजार अली की घटना आज भी कई लोगों के जहन में ताजा होगी. किस तरह से एक अधिकारी के प्रमोशन के लिए विस्फोटक प्लांट करके इंतजार अली नामक निर्दोष डॉक्टर को फंसाया गया था. बाद में पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ और सच सबके सामने आया.
लेकिन लगता है कि इतनी बड़ी घटना से भी झारखंड पुलिस सबक नहीं ले सकी. लगातार मुखबिर के जाल में पुलिस फंस रही है. आइये हम आपको इस तरह की कई घटनाओं के बारे में बताते हैं, जिसमें झारखंड पुलिस मुखबिर के जाल में फंसकर निर्दोष लोगों के ऊपर कारवाई कर रही है.
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इंतजार अली को एक अधिकारी की प्रोन्नति के लिए फंसाया गया था
तकरीबन पांच साल पहले रांची की हिंदपीढ़ी के चिकित्सक इंतजार अली को झूठे केस में फंसाया गया था. और ये पूरी साजिश एक अधिकारी की प्रोन्नति के लिए रची गयी थी. इस राज का खुलासा गिरफ्तार दीपू खान ने किया, जो पुलिस का मुखबिर था. दीपू ने बताया था कि सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी को प्रोन्नति दिलाने के लिए विस्फोटक बरामदगी की साजिश रची गई थी. दीपू खान ने ही पुलिस को विस्फोटक की सूचना दी थी.
दीपू खान पश्चिम बंगाल के रानीगंज का रहने वाला था. वह हिंदपीढ़ी इलाके में जमीन के धंधे से जुड़ा था. उसने पुलिस को बताया था कि उसने खुद ही विस्फोटक प्लांट किया था. यह एक अधिकारी को प्रोन्नति दिलाने के उद्देश्य से किया गया था. विस्फोटक ऐसे स्थान पर रखना था, जहां कोई मुस्लिम व्यक्ति बैठा हो. वह इंतजार अली को नहीं जानता था. उसने केवल इतना जाना कि वह मुस्लिम है. इसलिए उसे फंसाने के लिए उसने वहीं पर विस्फोटक का बैग रख दिया था.
इससे बरामदगी के बाद संबंधित अधिकारी की प्रोन्नति की संभावना प्रबल हो सकती थी, इसलिए यह साजिश रची गई थी. बता दें कि घटना बीते 20 अगस्त 2015 की है. इंतजार अली रूरल मेडिकल प्रैक्टिसनर थे. वह 20 अगस्त को झालदा से मेडिकल कैंप लगाकर रांची लौट रहे थे. वे वर्द्धमान-हटिया पैसेंजर से लौट रहे थे कि किता स्टेशन के पास उन्हें विस्फोटकों वाले बैग के साथ पकड़ लिया गया. पुलिस ने काफी प्रताड़ित किया था और जेल भेज दिया. इस मामले में इंतजार अली को 56 दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा था.
बाद में उनकी रिहाई 16 अक्तूबर 2015 को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से हुई थी. सीआइडी ने इस मामले की जांच में आर्मी इंटेलिजेंस अफसर सूबेदार एसपी मिश्रा को मास्टरमाइंड बताया था. जांच में यह बात सामने आयी थी कि आर्मी इंटेलिजेंस अफसर के कहने पर हिंदपीढ़ी के मो. जाफरान ने विस्फोटक दिये थे, वहीं इस मामले में दीपू खान की भी अहम भूमिका थी.
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मुखबिर की सूचना पर निर्दोष को गांजा तस्करी में भेजा गया जेल
25 अगस्त 2019 की देर रात धनबाद के निरसा थाना से करीब दो किलोमीटर दूर देवियाना गेट एनएच टू के समीप निरसा पुलिस ने गांजा लदा एसयूवी पकड़ा था. निरसा पुलिस के मुताबिक, एसयूवी में लगभाग 40 किलो गांजा मिला था. मामले को लेकर निरसा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष सहित पांच लोगों पर गांजा तस्करी का आरोप लगा था. निरसा पुलिस ने चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.
इस मामले में चिरंजीत निर्दोष पाया गया, फिर उसे जेल से रिहा करवाया गया. धनबाद में गांजा तस्करी में निरसा पुलिस द्वारा निर्दोष ईसीएलकर्मी चिरंजीत घोष की गिरफ्तारी के मामले में कतरास पंचगढ़ी बाजार के नीरज कुमार तिवारी, तेतुलमारी गंडुआबस्ती के रवि कुमार ठाकुर और तेतुलमारी का सुनील कुमार चौधरी उर्फ सुनील पासी को शुक्रवार को सीआइडी ने गिरफ्तार कर लिया है.
चर्चा है कि नीरज तिवारी पुलिस के लिए मुखबिरी का काम करता था. तीनों पर ईसीएल कर्मी को गांजा तस्करी में फंसाने के लिए षडयंत्र रचने का आरोप है. इन तीनों के खिलाफ तस्करी के लिए वाहन और गांजा प्लांट करने के साक्ष्य मिलने के बाद सीआइडी ने इनकी गिरफ्तारी की. तीनों के पीछे के नेटवर्क को भी सीआइडी खंगाल रही है. मामले में सीआइडी की यह पहली कार्रवाई है.
इसके पहले तत्कालीन निरसा थानेदार से सीआइडी ने पूछताछ की थी. गिरफ्तार तीन युवकों को भी सीआइडी ने पूछताछ के लिए तलब किया था. पूछताछ और अनुसंधान के क्रम में इनकी संलिप्तता मिलने के बाद सीआइडी ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया. पूरे प्रकरण में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है. गांजा प्रकरण में बंगाल और झारखंड के दो डीएसपी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है. इन पर कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है.
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मुखबिर ने आतंकवादी होने की गलत सूचना देकर करायी छापेमारी
आतंकवादियों को नकेल कसने के लिए बनाया गया एटीएस, खुद मुखबिर के जाल में फंस गया. मुखबिर दिलावर ने 4 जून 2020 को एटीएस के एसपी शैलेंद्र वर्णवाल को सूचना दी थी, कि रांची के सदर थाना क्षेत्र के रांची नर्सिंग होम के समीप प्रतिबंधित संगठन सिमी का आतंकवादी अपने लोगों के साथ मौजूद है.
इस सूचना पर एटीएस की टीम मुखबिर के साथ भेजी गयी. रांची नर्सिंग होम के पीछे स्थित एक घर से गत गुरुवार को राकेश कुमार सिंह, आदिल अफरीदी के अलावा 10 अन्य लोगों को भी पकड़कर एटीएस अपने साथ ले गयी. इस दौरान दो पिस्टल और मैगजीन भी बरामद करने का दावा किया गया.
जब मामले में वरीय अफसरों ने छानबीन की, तब मामला कुछ और ही निकला. एक वरीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुखबिर दिलावर ने एटीएस को सिमी के आतंकवादी के होने की सूचना दी थी. उसने ही दो पिस्टल और मैगजीन प्लांट करा कर राकेश और अफरीदी के साथ अन्य 10 लोगों को पकड़वाया था. राकेश और अफरीदी का पुराना आपराधिक इतिहास था, इसलिए इन दोनों को पकड़ कर रांची पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया. जबकि 10 अन्य लोगों को छोड़ दिया गया.
जांच में पता चला कि दिलावर के पास चार हथियार थे, जिसमें से उसने दो प्लांट किये थे. बाकी के दो हथियार दिलावर से बरामद किये जाने बाकी हैं. मामले में रांची की सदर पुलिस ने दिलावर को पकड़ लिया है. उससे पूछताछ की जा रही है. एटीएस ने एफआइआर के लिए आवेदन दिया है. इस मामले में एटीएस की ओर से प्राथमिकी के लिए रांची की सदर थाना पुलिस को आवेदन दिया गया है. बताया जा रहा है कि राकेश और अफरीदी की गिरफ्तारी संदेहास्पद है. इसलिए दोनों को सीआरपीसी की धारा 169 के तहत थाना से बेल देकर रिहा कर दिया जायेगा. जबकि, दिलावर को साजिश रचने के आरोप में जेल भेजा जायेगा.
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