
Ranchi : 6ठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर बीते चार साल से विवाद चल रहा है. इस परीक्षा के फाइनल रिजल्ट आने के बाद से एक बार फिर विवाद बढ़ा है. और यह बढ़ता ही रहा है. फाइनल रिजल्ट के बाद जेपीएससी पर अब तक 14 मामले दर्ज हो चुके हैं. अहम बात यह है कि रिट याचिका दायर करने वालों में सफल उम्मीदवार भी शामिल हैं.
उम्मीदवारों की मानें तो रिट याचिका की संख्या बढ़ेगी. अभी जिन उम्मीदवारों ने याचिका दायर की है उनमें राहुल कुमार, कृष्णा मुरारी चौबे, मनीषा तिर्की, मुकेश कुमार, हरिनारायण भगत आदि है. याचिका दर्ज करने संबंधी जानकारी जेपीएससी अभ्यर्थी अनिल पन्ना, राज कुमार मिंज और शशि पन्ना ने दी है.
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सफल उम्मीदवारों ने भी की है रिट याचिका दायर
जेपीएससी पर सफल उम्मीदवारों ने भी याचिका दायर की है. ये सफल उम्मीदवार भी जेपीएससी की गलती के शिकार हुए हैं. जेपीएससी ने मेधा सूची निकालते समय वैसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को सामान्य कोटि में शामिल किया है जिनका प्राप्तांक सामान्य जाति के लिए निर्धारित न्यूनतम प्राप्तांक से अधिक है.
ऐसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों की परेशानी यह है कि उनको अपने कोटि के बाकी सारे उम्मीदवारों की तुलना में अधिक नंबर तो आये हैं. लेकिन उनको प्रशासनिक सेवा/ पुलिस सेवा नहीं मिल रही है.
क्योंकि सामान्य कोटि में उनका रैंक नीचे है. अगर वे अपने आरक्षित कोटे में रहते तो टॉपर होते. और उनको प्रशासनिक सेवा/पुलिस सेवा के पोस्ट मिल जाते.
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विज्ञापन से रिजल्ट तक में विवाद
6ठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में विवाद उसके विज्ञापन जारी होने से लेकर अंतिम रिजल्ट जारी होने तक है. अब तो मेधा सूची में भी विवाद होने लगा है. जेपीएससी ने अपने विज्ञापन में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों के कोटिवार न्यूनतम प्राप्तांक निर्धारित किये थे.
लेकिन उसने विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया था कि न्यूनतम अंक विषयवार लाना है या एग्रीगेट में. इसके अलावा आयोग ने मुख्य परीक्षा के पेपर 1 के क्वालिफाइंग मार्क्स को जोड़ कर मेधा सूची तैयार की. जबकि क्वालिफाइंग पेपर के मार्क्स जोड़े नहीं जाते हैं.
इसके अलावा आयोग ने मेधा सूची में भी गड़बड़ी की. जिस वजह से कोटिवार सफल उम्मीदवारों के पास अंक होने के बाद भी उन्हें योग्यता के अनुसार सेवा नहीं मिल पायी.
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