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स्कूल रि-ओपन के बाद बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति सजग हो रहे भारतीय पैरेंट्स: सर्वे रिपोर्ट

Ranchi: दुनिया के कई देशों में कोविड-19 के बाद स्कूल खुलने से बच्चों के संक्रमित होने के मामले देखने को मिले हैं. इधर देश में कोविड-19 के मरीजों की बढ़ती संख्या ने भारतीय अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. यही वजह है कि भारतीय पैरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर सजग हो रहे हैं.

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पैरेंट्स को भरोसा नहीं कि स्कूल मेंटेन कर पायेंगे सोशल डिस्टेंसिंग

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 224 जिले में एक सर्वेक्षण कराया गया है. इस सर्वेक्षण के मुताबिक अधिकांश अभिभावक इस बात पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं कि स्कूल सोशल डिस्टेंसिंग को मेनटेन कर पायेंगे. वहीं वर्चुअल क्लासेस के दौरान वाइरस के फैलने को रोक पायेंगे.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग जहां स्कूलों को फिर से खोलने की प्लानिंग कर रहा है. कई तरह के गाइडलाइन तैयार कर रहा है. इसके बाद भी अभिभावकों में इसे लेकर कोई उत्साह नहीं दिख रहा है. सर्वेक्षण में शामिल अभिभावकों में से केवल 11 फीसदी अभिभावक ही चाहते हैं कि स्कूल फिर से खुले. और स्कूल अपने मूल एकेडमिक कैलेंडर के साथ ही खुले.

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देश में तीन हफ्ते तक केस नहीं होने पर खोले जाएं स्कूल

लोकल सर्कल ग्रुप की ओर से देश के 224 जिला के 18000 पैरेंट्स के बीच कराये गये सर्वेक्षण के मुताबिक 37 फीसदी अभिभावकों का मानना है कि स्कूल फिर से तभी खुले जब संबंधित जिला में 20 किमी के दायरे में 21 दिन तक कोविड-19 का कोई नया मामला सामने न आये. वहीं 20 फीसदी अभिभावकों को मानना है कि स्कूल तभी रि-ओपन किये जाएं जब देश में लगातार तीन हफ्ते तक कोई नया मामला सामने नहीं आया हो.

जबकि 13 फीसदी भारतीय अभिभावक यह महसूस करते हैं कि देश में स्कूल तब तक बंद रहे जब तक कोविड-19 का वेक्सीन विकसित नहीं हो जाये. 16 फीसदी अभिभावक को इस सर्वेक्षण के मुताबिक मानना है कि राज्य में 21 दिनों तक कोई केस नहीं आने पर ही स्कूल खोले जाएं.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग के अनलॉक 1.0 की गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल राज्यों के दिशा-निर्देश के मुताबिक ही खोले जाएं. कई राज्यों का कहना है कि स्कूल जुलाई माह से खोले जाएं. इस पर कई अभिभावकों का कहना है कि बहुत से स्कूलों ने लॉकडाउन के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बेहतर ढंग से पढ़ाना भी शुरू किया है. और यह कई मामलों में प्रभावशाली भी रहा है. ऐसे में केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर ग्रामीण भारत में इंटरनेट, टेलीविजन और रेडियो के माध्यम से पढ़ाई कराने के रास्ते तलाशने चाहिए.

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ऑनलाइन एजुकेशन को बेहरत बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने का अनुरोध

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने अपने सीनियर क्लासेस के साथ जुलाई में स्कूल खोलने का निर्णय लिया है. सर्वेक्षण के 76 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आसान नहीं होगा. सर्वेक्षण में शामिल अभिभावकों ने उदाहरण देते हुए इस बात पर ध्यान देने को कहा है कि डेनमार्क और क्रोसिया में स्कूल रि-ओपन होने के बाद 70 नये मामले सामने आये.

वहीं इजरायल में 220 स्टूडेंट्स और अभिभावक कोरोना पॉजिटिव पाये गये.
इस सर्वेक्षण के परिणाम गृह मंत्रालय, एमएचआरडी और राज्यों के मुख्य सचिव को भेजे गये हैं, जिसमें ऑनलाइन एजुकेशन को बेहरत बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने का अनुरोध किया गया है.

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