
Amit Jha
Ranchi : राज्य में खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया प्लेयर्स के लिए अंतहीन मैराथन साबित हो रही है. 2012 से अब तक झारखंडी खिलाड़ियों ने 3 से 4 बार सीधी नियुक्ति के लिए आवेदन किये हैं.
नवम्बर, 2019 में किये गये आवेदन के बाद पहली बार खेल विभाग ने एक कदम आगे बढ़ाया. जिन्होंने आवेदन किये थे, उनकी स्क्रूटनी की. इस साल फ़रवरी में 30 खिलाड़ियों को अंततः हर तरह से शॉर्टलिस्टेड किया गया.
इसके बाद उनकी फाइल पर कोरोना का साया पड़ गया. खेल विभाग लॉक डाउन के बाद इस पर विचार करने की बात कह रहा है.
उधर खिलाड़ी बेचैन हैं कि दो सालों में 24 डीएसओ (जिला खेल पदाधिकारी) की नियुक्ति अंतिम चरण तक पहुंच गयी पर 30 खिलाड़ियों में से एक को भी फोर्थ ग्रेड के लायक भी नहीं समझा गया. कोरोना के नाम पर फाइल अटकी ना रह जाये.
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पुरानी नौकरी छोड़ने का लिखवाया गया था बांड

नवम्बर, 2019 में जारी विज्ञापन के आलोक में सैकड़ों खिलाड़ियों ने आवेदन किये थे. इनमें से 216 आवेदनों को विभिन्न कारणों से ख़ारिज कर दिया गया था.
30 खिलाड़ियों के आवेदन को उनकी योग्यता, खेल परफॉरमेंस के आधार पर योग्य पाया गया. चयनितों को खेल निदेशालय ने जरुरी कागजात, प्रमाण पत्रों के साथ रांची के मोराबादी स्थित कार्यालय में 11 फ़रवरी को बुलाया.
यहां कागजातों, प्रमाण पत्रों की स्क्रूटनी की गयी. उनसे बांड भी लिखवाया गया कि अगर वे कहीं नौकरी कर रहे हैं तो उसे छोड़कर आना होगा. झारखण्ड का स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र भी होना चाहिए.
खिलाड़ियों ने अपने बेहतर भविष्य की आस में इन पर सहमति जता दी.
3 सालों में बन गये साहब, 8 सालों में चपरासी बनने का भी मौका नहीं
2017 में जिला खेल पदाधिकारी के 24 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन जेपीएससी ने मंगाये. नवम्बर, 2019 में परीक्षा ली गयी. फ़रवरी 2020 में परिणाम जारी कर दिया.
अब तो सीएम हेमंत सोरेन ने 24 डीएसओ के पदों पर नियुक्ति किये जाने को अपनी अनुशंसा भी दे दी है. इनमें से 2-3 तो ऐसे हैं जिन्होंने खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति वाले विज्ञापन के लिए भी आवेदन किया था.
खेल विभाग ने जब भी आवेदन मंगाये हैं, उसमें सीधी नियुक्ति के लिए तीन कैटेगरी बतायी गयी- ख, ग और घ. मतलब यह कि खिलाड़ियों को उनकी एकेडमिक क्षमता के हिसाब से चपरासी के पदों पर भी काम करना पड़ सकता है.
3 सालों में गिने चुने खिलाड़ी खेल पदाधिकारी बनने की दहलीज पर आ गये, वहीं एक भी खिलाड़ी चपरासी के लिए भी जगह नहीं बना सका है.
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सीएम हेमंत सोरेन पर टिकी उम्मीद
सीधी नियुक्ति की आस में बैठे खिलाड़ी 2012 से ही आवेदन करते आ रहे है. डीएसओ का रिजल्ट आने के बाद अब वे सीएम हेमंत सोरेन से ही आस लगाये बैठे हैं कि उनकी पहल पर ही उनका कैरियर संवरेगा.
अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने 5 खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरी दी थी. झानू हांसदा, विंध्यवासिनी देवी, अरुणा मिश्रा जैसे प्लेयर्स को उनकी ही बदौलत रोजगार का अवसर मिला.
इसके अलावा झारखण्ड में किसी भी सरकार ने एक भी खिलाड़ी को कहीं नियोजित होने का मौका नहीं दिया है.
लॉक डाउन के बाद बढ़ेगी प्रक्रिया
खेल निदेशक अनिल कुमार सिंह के अनुसार अभी कोरोना और लॉक डाउन की स्थिति है. यह सब ख़त्म हो जाये तो सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
मुख्य सचिव के स्तर से निर्णय लिया जायेगा कि खिलाड़ियों को उनकी अकादमिक और अन्य योग्यता के आधार पर किन-किन विभागों में रोजगार का अवसर मुहैया कराया जा सकता है.
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