
NW Desk : पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना को लेकर देश के नाम दिये गये अपने सभी संबोधनों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सख्ती से करने को कहा है. कुछ हद तक तो लोग इसका पालन भी कर रहे हैं. लेकिन सोमवार को गाजियाबाद के घंटाघर रामलीली मैदान में जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती देखी गयी.
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एक साथ उमड़ा हजारों की भीड़
दरअसल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सोमवार को फंसे हुए प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए यूपी सरकार ने ट्रेनों का इंतजाम किया है. लेकिन इनमें से बिहारी मजदूरों को रोका गया और उनका पहले रजिस्ट्रेशन किया गया. जिससे रामलीला मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ीं.
सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह वहां ड्यूटी कर रहे अधिकारियों को भी नहीं था. वहां मौजूद एडीएम सिटी शैलेंद्र प्रताप ने इस बारे में कहा कि वे प्रभारी यहां के नहीं हैं. सिर्फ बस के प्रभारी हैं, स लिहाज से कोई बयान नहीं देंगे.
मैदान में उमड़े हजारों की संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों और बिहार जाने वाले थे. मैदान में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि सभी मजदूर एक दूसरे पर लदकर खड़े थे. और वहां भीड़ भी बेकाबू हुए जा रही थी.
फिर भी मजदूरों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा जा रहा था, लेकिन ना तो वहां उतनी जगह थी और ना ही कोई इस बात को सुनने को तैयार था.
मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, जब उस स्थान पर आरोग्य सेतु एप्प खोला गया तो महज 500 मीटर पर कोरोना संक्रमित मरीज के होने का पता चला. जो सबसे बड़ी चिंता का विषय है. क्योंकि अगर रामलीला मैदान में मौजूद भीड़ को कोरोना होने के पूरे चांस हैं. जिसका परिणाम बहुत भयंकर होगा.
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मजदूरों के इंतजाम की बातें सिर्फ हवा हवाई
रविवार को देश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की पांचवी और आखिरी किश्त का ऐलान किया. इस ऐलान में मजदूरों की घर वापसी पर खासा जोर दिया गया. सीतारमण ने कहा था कि सरकार ने मजदूरों की घर वापसी के लिए ट्रेन और बसों का इंतजाम किया है. हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से भी पैदल चलने वाले मजदूरों को राहत देने की बात इससे पहले कही गयी थी. लेकिन ये सारी बातें सिर्फ बातें ही रह गयी हैं.
अभी भी जिस तरह से मजदूर पैदल चल रहे हैं, वो सरकार को मुंह चिढ़ाने जैसा ही है. क्योंकि इन मजदूरों को अपने घर पहुंचना है. क्योंकि अगर सही मायने में इंतजाम ठीक होते तो एक साथ गाजियाबाद से घंटाघर रामलीला मैदान में भीड़ इस तरह से बेकाबू ऩहीं होती.
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