
Rahul Guru
Ranchi: वैश्विक महामारी कोरोना का प्रभाव हर सेक्टर में पड़ा है. एजुकेशन इंडस्ट्री भी इससे अछूता नहीं है. लॉक डाउन के साथ आये शब्द ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ ने भविष्य में आने वाले बदलाव के संकेत दे दिये हैं.
हम जरूर विकल्प के तौर पर ऑनलाइन माध्यमों की बात कर रहे हैं, पर इसके लिए हमें काफी तैयार होने की जरूरत है.
बीते डेढ़ माह में शिक्षा जगत के बड़े समूह कोचिंग इंडस्ट्री पर इस वैश्विक महामारी का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है. कोरोना का कोचिंग इंडस्ट्री और वहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स पर कितना असर डाला है, पढ़ें रिपोर्ट की पहली किस्त में…
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ऑनलाइन हो चुकी हैं सारी क्लासेस
कोरोना की वजह से हुए लॉक डाउन और इसके लंबे होते समय में रांची के कोचिंग इंडस्ट्री ने खुद को काफी बदल लिया. इन्होंने अपने यहां नामांकन लिए बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर दिये.
कोचिंग संस्थानों में लगभग एक माह से ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं. संस्थानों की मानें तो उन्होंने हर उस प्लेटफॉर्म की तलाश की है जो ऑनलाइन क्लासेस की सुविधा देते हैं. इसके बाद उन विकल्पों में जो सबसे बेहतर विकल्प है उससे वे बच्चों की क्लास ले रहे हैं.
शहर में मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों में एक बायोम इंस्टीट्यूट के निदेशक पंकज सिंह कहते हैं कि समय की जरूरत और बच्चों की मांग को देखते हुए हमने ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत की है.
उन्होंने बताया कि हमारे यहां यू-ट्यूब लाइव के माध्यम से क्लासेस ली जा रही है. इसका लाभ यह हो रहा है कि बच्चों को क्लास का विजूअल साफ मिल रहा है और यहां टू-वे कम्यूनिकेशन करना आसान होता है.
बच्चों की सुविधा को देखते हुए हमने यू-ट्यूब में कुछ पैकेज लिये हैं, जो बच्चों के साथ चैट कर शिक्षकों को टू-वे कम्यूनिकेशन करने का लाभ देता है.
इसी तरह इंजीनियरिंग की तैयारी कराने वाले चैंप्स स्क्वेयर इंस्टीट्यूट के निदेशक मनीष सिन्हा कहते हैं कि ऑनलाइन क्लासेस उन्हीं संस्थानों का सही से चल सकता है जिन्होंने किसी भी फ्री सर्विस का सहारा नहीं लिया होगा.
गूगल प्ले पर जूम और गूगल क्लास जैसे कई विकल्प हैं, पर इनसे पढ़ाई करना और कराना दोनों संभव नहीं है. वे कहते हैं कि यह अलग बात है कि आप कोरम पूरा करना चाहते हैं तो इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
जूम जैसे एप्स के सामने बोर्ड लगा कर पढ़ायें तो स्टूडेंट्स तक जो क्लास की क्वालिटी पहुंचती है वो उनके किसी काम की नहीं रह जाती है.
वहीं फिटजी रांची सेंटर के पंकज कुमार कहते हैं कि इस विपरित परिस्थिति में वही संस्थान बने रह सकते हैं जो बदलते तकनीक और बच्चों की मांग के बीच तालमेल बनाये रखेंगे.
हमने फिटजी में जो ऑनलाइन क्लासेस शुरू किये हैं उसे कराने के लिए जूम के पेड वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं और फिटजी में 57 बैच के स्टूडेंट्स इसका सीधा लाभ ले रहे हैं.
इस तरह की समस्या केवल मेडिकल-इंजीनियरिंग के कोचिंग संस्थानों के साथ नहीं है. बच्चों के साथ कनेक्टिविटी की समस्या बैंकिंग, एसएससी, रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान भी झेल रहे हैं.
रांची के लगभग 80 फीसदी कोचिंग संस्थान ऑनलाइन क्लासेस चलाने की बात तो करते हैं, लेकिन बच्चों को मिलने वाली क्वालिटी और उनकी संतुष्टि के सवाल पर वे चुप हो जाते हैं.
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जहां होते थे तीन बैच, अब चल रहे एक
कोचिंग इंडस्ट्री में जो बदलाव इस लॉक डाउन की वजह से आया है वो क्लास की संख्या पर सीधा देखने को मिल रहा है. मेडिकल कोचिंग कराने वाले बायोम इंस्टीट्यूट के निदेशक पंकज सिंह कहते हैं कि सामान्य दिनों में मई माह तक एक वर्षीय और दो वर्षीय प्रोग्राम के तीन-तीन बैच हुआ करते थे, पर अभी स्थिति ऐसी है कि एक बैच ही हमारे संस्थान में चल रहा है.
कुछ इस तरह की ही बात चैंप्स के मनीष सिन्हा भी कहते हैं. वे कहते हैं कि मार्च से मई के बीच रांची के कोचिंग इंडस्ट्री में रांची के बाहर के 5000 से अधिक स्टूडेंट्स आते थे, पर इस कोरोना की वजह से इनकी संख्या में लगभग 60 फीसदी तक की गिरावट आयी है. अभी तो बैच बनाने की बात तो सोचते भी नहीं हैं.
आधे से भी कम हुए कोचिंग इंडस्ट्री में स्टूडेंट्स
रांची में फिटजी, चैंप्स, ब्रदर्स एकेडमी, न्यूटन ट्यूटोरियल, बायोम, गोल जैसे बड़े संस्थानों के अलावा 50 से अधिक छोटे-छोटे कोचिंग संस्थान मेडिकल-इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं.
इनके निदेशकों ने बताया कि जब कोचिंग इंडस्ट्री अपने उफान पर रहती है, ठीक उसी समय लॉक डाउन का सामना करना पड़ा. इसका सीधा असर आय पर पड़ा.
बायोग और चैंप्स के अलावा कई संस्थानों के निदेशकों ने कहा कि हमने ऑनलाइन क्लासेस शुरू किये. इसके बाद भी बच्चों का रूझान नहीं आया. आय की बात करें तो 60 से 65 फीसदी तक कमी हो गयी है.
जबकि फिटजी के पंकज कुमार इसे अवसर की तरह लेते हैं. उनका कहना है कि मेरे यहां 8 अप्रैल के बाद से अब तक लगभग 97 स्टूडेंट्स से इनरॉल कराया है. जबकि यही आम दिन होता है तो इसकी संख्या 130 के करीब होती.
बताते चलें कि फिटजी अपने यहां नामांकन की प्रक्रिया अक्टूबर माह के बाद से ही शुरू कर देता है.
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