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#CoronaOutbreak : 1500 बेड वाले रिम्स में आधी हो गयी मरीजों की संख्या, मौत के मामले हुए दोगुने

Ranchi: कोरोना वायरस के राज्य में दस्तक देने के बाद रिम्स में मरीजों की संख्या आधी हो गयी है. 1500 बेड वाले रिम्स में 700 से 800 के बीच ही मरीज ही भर्ती रहते हैं. पर कोरोना के कारण मरीजों के इलाज में डॉक्टर सही से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.

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न्यूरोसर्जरी वार्ड में अब भीड़ का वो आलम देखने को नहीं मिल रहा जिसमें मरीजों की संख्या बेड की तुलना में दोगुनी होती थी  और मरीजों का इलाज गलियारों में ही होता था.

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रिम्स के मेडिसिन वार्ड के आधे बेड अब मरीजों के बिना खाली हैं. ऐसा ही हाल रिम्स के लगभग हर विभाग का है. पर आधे हो चुके भीड़ में मरने वालों की संख्या लगभग दोगुनी हो गयी है.

1500 बेड वाले इस अस्पताल में लॉक डाउन के 48 दिनों में करीब 1750 से अधिक मरीजों की जान चली गयी है.

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रिम्स इलाज कराने नहीं पहुंच रहे मरीज

रिम्स के अधिकतर विभाग में सिर्फ गंभीर मरीज ही भर्ती हैं.  ऐसे मरीज जिनकी हालत बहुत खराब है. लॉक डाउन के दौरान यातायात की व्यवस्था नहीं होने और रिम्स में ओपीडी सेवा बहाल नहीं होने के कारण कई मरीज अपना इलाज कराने नहीं आ रहे हैं.

वहीं रोड में गाड़ियां नहीं चलने के कारण एक्सीडेंटल मरीजों की संख्या में भी भारी कमी आयी है.

रिम्स के न्यूरो विभाग में बेड की संख्या से लगभग 3 गुना लोग भर्ती रहते थे जिसमें से अधिकतर केस एक्सीडेंटल होते थे पर लॉक डाउन के दौरान ऐसे मामलों में भारी कमी आयी है और रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में मरीजों का लोड बहुत कम हो गया है.

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ब्लड डोनर नहीं होने से बढ़ी परेशानी

रिम्स में कई ऐसे मरीज एडमिट है जिन्हें ब्लड की जरूरत होती है. लॉक डाउन के कारण मरीजों को डोनर नहीं मिल पा रहे हैं. इसलिये उन्हें खून मिल पाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

सरकारी निर्देश के बावजूद मरीजों को खून के बदले डोनर लाने को मजबूर किया जाता है. सरकारी निर्देश के अनुसार किसी मरीज से डोनर लाने को अस्पताल मजबूर नहीं कर सकता. मरीजों के खून की व्यवस्था अस्पताल को ही करनी है.

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