
Palamu : कोरोना संक्रमण के कारण घोषित लॉकडाउन के कई साइड इफेक्ट सामने आये हैं. परिवहन की सुविधा और पास निर्गत नहीं होने के कारण एक बुजुर्ग मां अपने मृत बेटे का मुंह तक नहीं देख पायी. श्राद्धकर्म में भी शामिल होने पर संशय की स्थिति बनी हुई. लगातार रोते रहने के कारण महिला का बुरा हाल है.
बताया जाता है कि जिले के हैदरनगर निवासी अखिलेश्वर तिवारी की सास सौ वर्षीय रामराजी देवी फरवरी के प्रथम सप्ताह में बिहार के रोहतास से हैदरनगर आयी थी. बेटी के यहां रहते हुए लॉकडाउन की घोषणा हो गयी. इसके बाद परिवहन की कोई सुविधा नहीं होने के कारण महिला अपनी बेटी के घर पर ही रह रही थी.
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26 अप्रैल की हो गयी मौत
इसी बीच उनके बड़े पुत्र 75 वर्षीय हरिशचंद्र तिवारी की अचानक तबियत बिगड़ने के बाद डेहरी ऑन सोन से उन्हें 25 अप्रैल को वाराणसी रेफर कर दिया गया. इलाज के दौरान 26 अप्रैल को वाराणसी के एक अस्पताल में उनकी मौत हो गयी.
बीमारी की खबर सुन कर रामराजी देवी बेचैन हो गयीं. वह किसी तरह अपने पुत्र को देखना चाहती थीं. उनके दामाद हैदरनगर निवासी अखिलेश्वर तिवारी ने हर संभव प्रयास किया कि रामराजी देवी को उनके पुत्र का चेहरा दिखा दें. उन्होंने जिला प्रशसन द्वारा निर्गत 1950 व राज्य के टॉल फ्री नंबर 181 के अलावा पलामू के उपायुक्त के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया. कहीं से उन्हें जाने का उपाय नहीं बताया गया. रामराजी देवी का बड़े पुत्र की मौत की खबर सुन कर रो-रो कर बुरा हाल है. वह दिन रात एक ही रट लगायें हैं. उन्हें किसी तरह घर पहुंचा दिया जाये.
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पास की व्यवस्था करने की मांग
वहीं हरिशचंद्र तिवारी की बहन कालिंदी देवी भी परेशान हैं. उन्हें मलाल है कि वह अपने भाई का मुंह भी नहीं देख सकीं. अब इन दोनों की एक ही इच्छा है कि किसी तरह प्रशासन इन्हें उनके श्राद्धकर्म में जाने की व्यवस्था करे. उन्होंने कहा कि जब कोई रिश्ता नाता मरनी जीनी में भी शामिल नहीं हो सकते तो ऐसा जीवन बचा कर ही क्या फायदा होगा? उन्होंने जिला प्रशासन से श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए बिहार के रोहतास जिला अंतर्गत डेहरी ऑन सोन जाने की व्यवस्था कराने की मांग की है.
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