
Jamshedpur : नए साल के मौके पर लोगों को बधाई देते हुए टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में जमशेदपुर देश के टॉप 10 शहरों में से एक है. लेकिन साल 2019 में शहर में 200 से अधिक डेंगू के मरीज सामने आये. 12 लोगों की मौत डेंगू से हुई.
बता दें कि डेंगू के लार्वा गंदे पानी में पनपते हैं. तो सवाल ये उठता है की इतनी सफाई वाले शहर में डेंगू के इतने मरीज कैसे आये. सितंबर 2019 में डेंगू के खौफ के चलते पूरे शहर में हाई अलर्ट जारी करना पड़ा. फिर भी सफाई के मामले में शहर का अपने आप में अव्वल होना स्वच्छता के पैमाने पर भी सवाल खड़ा करता है.
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जुस्को कर रहा लापरवाही
जानकारी के अनुसार, जिला स्वाथ्य विभाग ने एंटी लार्वा का छिड़काव पूर शहर में खूब किया. लेकिन इसमें लापरवाही जमशेदपुर युटीलीटी एंड सर्विसेज ऑर्गेनाइजेशन (जुस्को) ने की. आपको बता दें कि जुस्को भी टाटा समूह का ही हिस्सा है.
जुस्को ने अपने डंपिग यार्ड में साल भर में एक बार भी एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं किया. जहां टाटा स्टील के सैकड़ों कचरे के डस्टबीन पड़े हैं. जिसमें बारिश का पानी जमा होता है. खास बात ये है की ये डंपिंग यार्ड शहर के बीचों-बीच साकची में टाटा स्टील के कैप्टीव प्लांट के पास है. इसमें डेंगू के मच्छर पलते हैं. जिसकी परवाह जुस्कों ने कभी नहीं की.
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क्या कहते हैं आंकड़े
जमशेदपुर में साल 2019 में 200 से अधिक लोग डेंगू के शिकार हुए. जिसमें 12 लोगों की मौत हो गयी. 2018 में 100 लोगों को डेंगू का डंक लगा तो वहीं 2017 में 500 से ज्यादा लोग डेंगू के शिकार हुए. जिला स्वाथ्य विभाग ने एंटी लार्वा के छिड़काव करने में बीते साल कोई कसर नही छोड़ी.
इस दिशा में क्विक रिस्पांसिव टीम का गठन किया गया. उसके बाद भी डेंगू विभाग के लिए सिरदर्द बना रहा. लाख कोशिशों के बावजूद विभाग ये पता नही कर पाया कि आखिर लार्वा पनप कहां रहें हैं. क्योंकि सर्वे किये गये सभी जगहों पर एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ था.
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