
Jamshedpur: पूर्वी जमशेदपुर में भले ही चुनाव प्रक्रिया खत्म हो गयी हो. लेकिन राजनीतिक पारा अभी तक नीचे नहीं गिरा है. सरयू राय सीएम रघुवर दास पर लगातार हमलावर हैं. इस बार उन्होंने उनके ऊर्जा विभाग पर गंभीर आरोप लगाया है.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर उन्होंने रघुवर दास के विभाग पर गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि राज्य भर में पावर सब स्टेशन बनाने के लिए 850 करोड़ का टेंडर होना था. टेंडर प्रक्रिया में एल वन ऐसी कंपनी (फ्लोमोर) हो गयी, जिसे बिहार सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर रखा था.
उस कंपनी को ठेका देने के लिए नीचे से ऊपर तक तय हो गया था. जब मैंने इस मामले को लेकर सवाल उठाये तो कंपनी का आदमी बिहार गया. बिहार जाकर कंपनी के अधिकारी ने विभाग से लिखवा कर लाया कि ब्लैकलिस्टिंग हटा ली गयी है.
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फिर जब मैंने सवाल उठाया कि आज ब्लैकलिस्टिंग हटी है. लेकिन जिस दिन कंपनी ने टेंडर भरा था उस दिन तो वो ब्लैकलिस्टेड थी. कंपनी के अधिकारी फिर बिहार गए, वहां जल संसाधन विभाग के लोगों से यह लिखवा कर लायी कि पहले से ही इसकी ब्लैक लिस्टिंग हटायी जा चुकी है.
कंपनी ने तीन साल पहले की ब्लैकलिस्टंग हटा दी. इस बारे मैंने बिहार के सीएम नीतीश कुमार को लिखा था. कार्रवाई हुई और विभागीय सचिव का तबादला हो गया. अंत में मेरे अड़े रहने पर और कुछ ईमानदार अधिकारियों ने कहा कि हम इसका समर्थन बोर्ड में नहीं करेंगे.
तब जाकर यह मामला दबा. टेंडर का मूल्यांकन होने से लेकर बोर्ड में टेंडर का प्रस्ताव जाने तक सभी इसी बात का समर्थन कर रहे थे कि फ्लोमोर नाम की कंपनी जिसे बिहार सराकर ने ब्लैक लिस्ट किया गया है, उसे टेंडर दे दिया जाए.
ऐसे में जितने भी लोग ऐसा चाह रहे थे उनपर कार्रवाई होनी चाहिए. और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मुख्यमंत्री के सचिवालय से ही टेंडर वैल्यूएशन कमेटी के मेम्बर को धमकाया गया. इतना ही नहीं कमेटी के दो लोगों को निंदन की सजा दे दी गयी.
दोनों ही अधिकारी सीनियर लेवल के अधिकारी हैं, वो दोनों मामले को लेकर हाईकोर्ट गए. मामला अभी हाईकोर्ट में ही है. दूसरी तरफ नयी वैल्यूएशन कमेटी बना ली गयी. कमेटी ने फिर से फ्लोमोर को टेंडर देने की बात कही. फिर से बात बोर्ड में गयी. बोर्ड में जाने के बाद वित्त सचिव ने समर्थन करने से साफ मना कर दिया.
इसके बाद बोर्ड से ही अलग एक प्रस्ताव पारित कराया गया कि इस मामले में जो बोर्ड का वित्तीय अधिकार है, वो एक समिति को दे दिया जाए. तो ब्लैक लिस्ट कंपनी को काम देने के लिए साल भर तक सीएम का विभाग इस बात पर अड़ा रहा. इसके पीछे जो लोग थे वो बेनकाब होने चाहिए.
जो ईमानदारी के टेंडर का मूल्यांकन कर रहे थे उसपर कार्रवाई हो गयी. मैनहार्ट मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ था. एक तरह से यह एक बड़ा स्कैम है. ऐसे स्कैम से आने वाले दिनों में नुकसान जनता हो होगा.
आगे सरयू राय ने सीएम के बिजली विभाग पर और आरोप लगाते हुए तेनुघाट थर्मल पावल स्टेशन के बारे कहा.
उन्होंने कहा कि इसी तरह से टीटीपीएस में पांच सालों में गड़बड़ी हुई है. इसके अलावा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जितने भी जनमीनार लगे हैं. उन जलमीनारों में डेडिकेटेड पावर सप्लाई के लिए जो काम किया गया है, उसमें दो बार या तीन बार तक पैमेंट लिया गया है. एक पेमेंट ठेकेदार ने कंपनी से कराया. एक पेमेंट बोर्ड से कराया. दो साल में मैं पहली बार इस बारे बोल रहा हूं. पहली बार यह सब मामला उजागर हो रहा है.
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