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पारा शिक्षक मोर्चा ने नियमावली में संशोधन की मांग की, 60-65 हजार शिक्षकों के अयोग्य होने का खतरा   

Ranchi :  शिक्षा विभाग द्वारा पारा शिक्षकों के लिए बनायी गयी नियमावाली से पारा शिक्षकों में असंतोष है. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से नियमावली में संशोधन करने की मांग की गयी है. मोर्चा की ओर से इस संबध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र लिखा गया है, जिसमें नियमावली के कुछ बिंदुओं में संशोधन की मांग की गयी.

मोर्चा की ओर से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा गया है कि नियमावली के अनुसार पारा शिक्षकों का वित्त पोषण भारत सरकार से संचालित समग्र शिक्षा अभियान के तहत किया जायेगा. मोर्चा ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान से वित्त पोषण समाप्त होने पर राज्य सरकार की ओर से पारा शिक्षकों का वित्त पोषण किये जाने का प्रावधान किया जायें. मोर्चा ने कहा कि सरकार की इस नियमावली से लगभग 60 हजार पारा शिक्षक अयोग्य हो जायेंगे.

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 कार्यानुभव के आधार पर ग्रेड पे देने की मांग

मोर्चा ने मांग की है कि पारा शिक्षकों को कार्यानुभव के आधार पर वेतनमान दिया जाये. टेट उत्तीर्ण, प्रशिक्षित एवं प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वेतनमान में अंतर किया जाये. वेतनमान तय होने के लिये विभागीय परीक्षा के लिए भी मोर्चा ने कई सुझाव दिये. जिसमें विभागीय परीक्षा से छूट देते हुए पारा शिक्षकों को नियोजित कर वेतनमान दिया जाये.

शेष पारा शिक्षकों के लिए स्कूल में नियुक्ति की तारीख से आठ साल की सेवा पूर्ण होने का प्रावधान किया जाये. इसमें कुछ प्रावधानों को हटाने की मांग भी पारा शिक्षकों ने की है. नियोजन और वेतनमान के लिए आठ साल के अनुभव गणना की बात की गयी है. वहीं आकलन परीक्षा का आयोजन कर 30 अंक लाने वाले सभी पारा शिक्षकों को वेतन दिये जाने का सुझाव मोर्चा ने दिया है.

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विभागीय परीक्षा में असफल शिक्षकों के लिये हो प्रावधान:

मोर्चा ने सुझाव दिया कि नियमावली के अनुसार विभागीय परीक्षा में असफल पारा शिक्षकों को वर्तमान सुविधा या मानदेय पर ही रखा जाये. उन्हें कार्य मुक्त नहीं किया जायें. वहीं एक अप्रैल 2019 से नियमावली प्रभावी किये जाने की मांग की गयी है. विभागीय नियमावली के अनुसार नियमावली निर्गत तिथि से इसे लागू माना जायेगा. विभाग की ओर से 25 अक्टूबर को इसे वेबसाईट में जारी कर दिया गया है.

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