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पं. दीनदयाल ने कहा थाः शीर्ष नेता गलत प्रत्याशी देते हैं, तो जनता-कार्यकर्ता सबक सिखायें

Akshay Kumar Jha

Ranchi: जिनके नाम से बीजेपी शुरू होती है. जिनका नाम लिए बगैर बीजेपी का शायद ही कोई काम पूरा हो. उस पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी किताब पॉलिटिकल डॉयरी में लिखा है कि

“कोई बुरा प्रत्याशी केवल इसलिए आपका मत पाने का दावा नहीं कर सकता कि वह किसी अच्छे दल की ओर से खड़ा है. दल के हाईकमान ने ऐसे व्यक्ति को टिकट देते समय पक्षपात किया होगा. अतः ऐसी गलती को सुधारना मतदाता-कार्यकर्ता का कर्तव्य है.”

पंडित दीनदयाल उपाध्ययाय के इन बातों को बीते महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में सच होता देखा गया है. उदाहरण के लिए हरियाणा के दादरी विधानसभा को लिया जा सकता है. 2014 में दादरी से दमदार प्रदर्शन करने वाले सोमबीर सांगवान की टिकट काटकर पार्टी ने चर्चित पहलवान बबीता फौगाट को दे दिया. लेकिन बबीता वहां से हार गयीं.

यानि वहां बीजेपी के आला अधिकारियों की गलती को मतदाताओं और कार्यकर्ताओं ने सुधारा. लिहाजा झारखंड के संदर्भ में भी कुछ ऐसा ही होने वाला है. करने को तो बीजेपी हर वक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों की बात करती है. लेकिन शायद ही उनकी बातों को प्रदेश बीजेपी अमल करती है.

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इन नेताओं के आगे पंडित जी के आदर्शों का क्या ?

ढुल्लु महतोः अगर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों की बात की जाए तो ढुल्लू महतो को बीजेपी से उम्मीदवार कतई नहीं बनाया जाना चाहिए था. ढुल्लू महतो पर रंगदारी के साथ-साथ महिला उत्पीड़न जैसे मामले दर्ज हैं. लेकिन फिर भी वो पार्टी के खास बने हुए हैं. मीडिया में छपी रिपोर्ट में इस बात का साफ जिक्र है कि ढुल्लू महतो एक बाहुबली किस्म के नेता हैं. डरा-धमका कर वो कोयला साइडिंग से वसूली का काम करते हैं.

आज उनके इस व्यवहार की वजह से ही क्षेत्र में बेरोजगारी चरम पर है. कोई भी बाहर की कंपनी उनके इलाके में काम करना नहीं चाहती. फिर भी वो बीजेपी के चहेते हैं. आगामी चुनाव में भी बाघमारा से उनका टिकट मिलना तय माना जा रहा है. इसलिए कहा जा सकता है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों की बात करना बीजेपी के लिए बेमानी है.

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शशिभूषण मेहताः तीन अक्टूबर को धक्का-मुक्की और मारपीट के हंगामे के साथ बीजेपी में शामिल होने वाले कुशवाहा शशिभूषण मेहता सिर्फ एक ही मामले में आरोपी नहीं हैं. वो सुचित्रा मिश्रा हत्याकांड के अलावा नौ और मामलों में आरोपी हैं. जिसमें से एक मामले में सीबीआइ ने चार्जशीट तक दाखिल कर ली है. बावजूद इसके चुनाव से ठीक पहले अनुशासित कही जाने वाली पार्टी बीजेपी में उन्हें बड़े ही सम्मान के साथ शामिल कराया गया.

हालांकि सुचित्रा मिश्रा के परिजनों ने जमकर इस बात का विरोध किया. इस हंगामे के बीच शशिभूषण मेहता बीजेपी में शामिल हुए. पूछे जाने पर पार्टी के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ का कहना था कि आरोप सभी पर लगते हैं. लेकिन जब आरोप साबित नहीं होता किसी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए.

शशिभूषण मेहता पर हत्या करने की कोशिश- आईपीसी की धारा 307, सरकारी कर्मी को चोट पहुंचाने की कोशिश- आईपीसी की धारा 332, हत्या- आईपीसी की धारा 302, दंगा फैलाना- आईपीसी की धारा 147, खतरनाक हथियार को लेकर दंगा करना- आईपीसी की धारा 148, जानबूझ कर किसी को चोट पहुंचाना – आईपीसी की धारा 323, आपराधिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सरकारी कर्मी को उसका काम करने से रोकना- आईपीसी की धारा 353 और गलत तरीके से किसी को रोकना- आईपीसी की धारा 341.

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भानूप्रताप शाहीः 2014 चुनाव लड़ने से पहले भवनाथपुर के विधायक भानूप्रताप शाही, जो अभी हाल में ही बीजेपी में शामिल हुए हैं, उन्होंने ही अपने हल्फनामे में कहा है कि उनपर आईपीसी की धारा 143, 188, 323, 504, 341, 342, 353, 379, 448, 420, 171F, 506, 147, 126, 127 के तहत चार्ज फ्रेम्ड है. उनपर 13 केस दर्ज हैं, जिनमें 10 गंभीर आईपासी की धारा के तहत केस चल रहा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बीजेपी की तरफ से शीर्ष नेतृत्व भवनाथपुर से भानू प्रताप शाही को टिकट देती है, तो फिर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों का क्या होगा. या पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था, वो शीर्ष नेतृत्व ना मानकर जनता औऱ कार्यकर्ता मानेगी.

 

पूर्व डीजीपी डीके पांडेः झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने भी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद बीजेपी का हाथ थाम लिया है. लेकिन उनपर अपने कार्यकाल के दौरान गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि अभी भी मामले की जांच चल रही है. जब वो सीआरपीएफ के डीजी थे तो उनपर भोले-भाले पांच सौ से ज्यादा आदिवासियों को फर्जी नक्सल बनाकर सरेंडर करने का आरोप लगा.

मामला अभी कोर्ट में है. वहीं झारखंड के डीजीपी रहते हुए बकोरिया एनकाउंटर की जांच को धीमा करने का आरोप लगा. दोनों आरोप किसी भी नौकरशाह के लिए एक गंभीर आरोप हैं.

लेकिन बीजेपी को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. और इन सब बातों के बीच पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों की बीजेपी को कितनी फिक्र है, जगजाहिर हो जाता है.

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