
Abinash Mishra
Jamshedpur: पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता इन दिनों पश्चिमी जमशेदपुर में एक्टिव हो गए है. क्षेत्र के चौक और चौराहों में आजकल उनके बैनर भी खूब दिखाई देते है.
उनके बैनर में इस बार न तो कांग्रेस का झंडा कहीं दिखाई दे रहा है और न ही पार्टी के बड़े नेताओं के चेहरे.
कांग्रेस से हो रहा मोहभंग!
बन्ना गुप्ता ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा तो नहीं की है लेकिन बिना कांग्रेस के झंडे के चुनाव प्रचार उनका पार्टी से मोहभंग की तरफ ही इशारा करता है. बीते कुछ समय से उनके बीजेपी में जाने की चर्चा भी है.
बन्ना रघुवर दास के अलावा के बीजेपी के बड़े नेताओं के चक्कर काट रहे हैं. उनको उम्मीद है की रघुवर दास अपने पार्टी के कद्दावर नेता सरयू राय का टिकट काटकर बीजेपी से चुनाव लड़ने का मौका देंगे.
शायद यही वजह है की बन्ना गुप्ता कांग्रेस के झंडे से परहेज कर रहे है.
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बन्ना की राह नहीं है आसान
भले ही बन्ना गुप्ता बीजेपी नेताओं के चक्कर काट लें. लेकिन पश्चिमी जमशेदपुर से खुद रघुवर दास के लिए भी उनको टिकट दिला पाना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है. क्योंकि बीजेपी के अंदर ही कई नेता है जो ताल ठोंक रहे हैं.
खुद रघुवर दास के सबसे करीबी रामबाबू तिवारी भी पश्चिमी जमशेदपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा खुले मंच से जता चुके है.
इसमें दो राय नहीं कि रघुवर दास और सरयू राय के बीच सैद्धांतिक मतभेद एक दशक से भी ज्यादा वक्त से है.
फिर भी रघुवर दास के लिए सरयू राय का टिकट काटना आसान नहीं होगा. बन्ना गुप्ता बस इस जुगाड़ में हैं कि रघुवर दास और सरयू राय के बीच की खटास का फायदा उनको मिल जाए.
कई और नेता है रेस में
बीजेपी से ही कई और नेता रेस में है. जिसमें सबसे पहला नाम अभय सिंह उज्जैन का है, जो झारखंड के पहले वित्तमंत्री मृगेंद्र प्रताप सिंह के बेटे हैं.
इसके अलावा देवेंद्र प्रताप सिंह और राजकुमार सिंह जैसे नेता भी हैं जो सालों से बीजेपी की सेवा कर रहे हैं और पश्चिमी सिंहभूम से चुनाव लडना चाहते हैं.
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कैसे तूल पकड़ी बन्ना के बीजेपी में जाने की खबर
महीने भर पहले बन्ना गुप्ता भगवाधारियों के साथ खुलेआम घुमे. इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी जमशेदपुर में हिंदू उत्सव समिति की अगुवाई भी जोर-शोर से की.
जिसके बाद से बन्ना के बीजेपी में जाने की खबर ने तूल पकड़ा और अब बैनर से कांग्रेस का झंडा हटा लेने से इस खबर को और हवा मिल गई है.
लेकिन अभी भी बन्ना खुलकर कुछ बोल नहीं रहे हैं, क्योंकि पश्चिमी जमशेदपुर में अल्पसंख्यकों का बड़ा वोट बैक है और उनकी नाराजगी बन्ना गुप्ता नहीं उठाना चाहते.
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