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#KasturbaSchools में सत्र 2019-20 के लिए घटायी गयीं #seats, फिर भी 14,127 रह गयीं खाली

Ranchi : बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की सबसे प्रभावी योजनाओं में से एक मानी जाती है कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूलों का संचालन.

यह भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित है. राज्य के 24 जिलों में कुल 203 कस्तुरबा गांधी बालिका स्कूल हैं.

जिला स्तरीय कमेटी के अनुमोदन के बाद ही इन स्कूलों में छात्राओं का नामांकन लिया जाता है.

साल 2019-20 के लिए इन स्कूलों में 1 लाख 1 हजार 500 सीटें थीं जिसमें से 77 हजार 223 सीटें भरी गयीं. इनमें 14 हजार 127 सीटें खाली रह गयीं.

इस साल प्रत्येक स्कूल में प्रत्येक कक्षा के लिये 75 सीटें नामाकंन के लिये रखी गयीं जबकि साल 2018-19 तक प्रति स्कूल स्वीकृत सीटें 100 थी.

साल 2018-19 को देखें तो 203 स्कूलों में 20 हजार 300 सीटें थीं जिसमें से 12 हजार 99 सीटें भरी गयीं और आठ हजार 201 सीटें खाली रह गयीं.

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ऐसे में जब स्कूलों में नामाकंन के लिये सीटें अधिक थीं तक भी सीटें नहीं भर पायीं और सीटें कम कर लक्ष्य बढ़ाने पर भी सीटें खाली रह गयीं.

11वीं में मात्र 7,283 छात्राओं ने लिया नामाकंन

राज्य के 203 कस्तूरबा बालिका स्कूलों में 11वीं कक्षा में मात्र 7,283 छात्राओं ने नामांकन लिया. राज्य शिक्षा परियोजना की मानें तो सत्र 2019-20 के लिए 12वीं में 7,628 छात्राएं हैं.

आवासीय विद्यालय होने के कारण पहले इन स्कूलों में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई होती थी जिसे बाद में राज्य सरकार ने 12वीं तक बढ़ाया.

लेकिन साल 2019-20 के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने सीटों में कमी कर दी. इसी साल कक्षा छह में कुल 13 हजार पांच सौ 87 छात्राओं का नामांकन लिया गया.

हॉस्टलों में है 1086 कर्मचारियों की कमी

कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूलों के हॉस्टलों में कर्मचारियों की काफी कमी है. इसमें अकाउंटेंट, हेड कुक, सहायक कुक, नाइट गार्ड, सहायक नाइट गार्ड के लिये कुल 2233 पद स्वीकृत हैं. इनमें से लगभग 1086 पद खाली हैं.

शिक्षा परियोजना की मानें तो 203 हॉस्टलों में एक एक अकाउंटेंट होने चाहिये. जबकि राज्य के 28 हॉस्टलों में अकाउंटेंट नहीं है. 175 हॉस्टलों में है. हेड कुक 180 स्कूलों मे है. 23 में नहीं है.

सहायक कुक प्रत्येक हॉस्टल में पांच होने चाहिये. ऐसे 568 पद खाली हैं. 447 सहायक कुक कार्यरत हैं. प्रत्येक हॉस्टल में दो-दो नाइट गार्ड के पद स्वीकृत हैं. ऐसे 406 में मात्र 200 कार्यरत हैं.

206 नाइट गार्ड के पद खाली हैं. सहायक नाइट गार्ड के भी प्रत्येक स्कूल में दो-दो पद हैं. 406 पदों में से इसमें भी 261 पद खाली है. 145 कार्यरत हैं.

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शिक्षा परियोजना ने माना, लक्ष्य से कम हो रहा नामाकंन

राज्य शिक्षा परियोजना की मानें तो इन स्कूलों में स्वीकृत लक्ष्य से कम नामाकंन पिछले कुछ सालों से लिये जा रहे हैं.

इसका मुख्य कारण या तो छात्राओं का स्कूल छोड़ देना या जिला स्तरीय चयन कमेटी तक अभिवंचित छात्राओं का नाम नहीं पहुंच पाना है.

वहीं हॉस्टल में कर्मचारियों की कमी और छात्राओं को होने वाली परेशानी भी इसका एक मुख्य कारण है. इन स्कूलों की स्थापना अभिवंचित छात्राओं को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिये की गयी है.

प्रखंड स्तर पर ट्रैफिकिंग, नक्सल प्रभावित, आदिम जनजातीय क्षेत्र की छात्राओं को इसमें प्राथमिकता दी जाती है.

इनका चयन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित प्रखंड स्तरीय कमेटी की ओर से किया जाता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में प्रखंड स्तर पर ही ऐसे छात्राओं को चिन्हित करने में कमी आयी है.

चयन में किये गये बदलाव

अब इन स्कूलों में अभिवंचित छात्राओं के साथ मेधावी छात्राओं का भी नामाकंन लिया जायेगा.

इसके लिये 75 प्रतिशत सीटों पर पहले की तरह प्रखंड स्तरीय चयन कमेटी के बाद जिला स्तरीय कमेटी में बालिकाओं का नाम चयनित किया जायेगा.

अन्य 25 प्रतिशत सीटों पर खुली लिखित और मौखिक प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नामांकन लिया जायेगा.

इसका मुख्य उद्देश्य अभिवंचित छात्राओं में प्रतियोगिता की भावना लाना है जिससे वो पढ़ाई न छोड़ें. साथ ही मेधावी छात्राएं भी निशुल्क शिक्षा लें पायें.

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