
Ranchi: एमपी के चर्चित हनी ट्रैप मामले में रोज ही नये खुलासे हो रहे हैं. उस मामले में आज एक और बड़ा खुलासा हुआ है. इस खुलासे के मुताबिक सेक्स रैकेट गिरोह की सरगना श्वेता जैन ने कई कॉलेज छात्राओं को भी जाल में फंसा रखा था.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रैकेट की सरगना औऱ मामले की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन ने एसआईटी को जानकारी दी है कि उसने मीडिल क्लास फैमिली से आने वाली लगभग 20 से अधिक कॉलेज गोअर छात्राओं को बड़े अफसरों के पास भेजा था.
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आपको बता दें कि हनी ट्रैप सेक्स स्कैंडल की जांच एसआइटी कर रही है. गिरफ्तार हुई श्वेता जैन और आरती दयाल के लैपटॉप और मोबाइल मेमोरी चीप में सेव बहुत सारे वीडियो और डॉक्यूमेंट मिलने की भी सूचना है.
इसकी जांच और रिपोर्ट तैयार करने के लिए अफसरों की एक टीम को ओवरटाइम करना पड़ रहा है. श्वेता ने साथ ही ये भी बताया है कि हनी ट्रैप रैकेट का मुख्य उद्देश्य सरकारी कान्ट्रैक्ट दिलवाने और एनजीओ को फंडिंग करवाने के लिए किया जाता था.
इसके लिए रैकेट वीआईपी लोगों को भी अपना टारगेट बनाता था. श्वेता ने बताया कि उसने राज्य की कई बड़ी कंपनियों को कांन्ट्रैक्ट दिलवाने में मदद की है. इस पूरे काम उसकी राइट हैंड आरती दयाल ने भी बड़ी भूमिका निभायी.
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आपको बता दें कि सेक्स रैकेट के मामले में आरोपी श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और बरखा को 30 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा दिया गया है. वहीं एक अन्य आरोपी आरती दयाल और मोनिका यादव को एक अक्टूबर तक पुलिस रिमांड में भेजा गया है.
और मोनिका यादव ने सरकारी गवाह बनना स्वीकार कर लिया है. श्वेता जैन ने एसआईटी टीम को बताया है कि डिमांड होने पर आईपीएस और आईएएस अफसरों के पास कॉलेज की छात्राओं को उनके पास भेजा जाता था.
इन छात्राओं में कुछ ने बताया है कि कई छात्रों को उनके पिता की उम्र के लोगों के साथ संबंध बनाना पड़ा. इस मामले में श्वेता ने जैन ने मोनिका यादव नाम की छात्रा का उदाहरण दिया है.
पूछता के दौरान मोनिका ने एसआईटी को बताया कि, ‘वो एक मीडिल क्लास फैमिली से है. श्वेता ने उसे नामी कॉलेज में एडमिशन करवाने देने के नाम पर ये काम करने के लिए कहा था. मुझे विश्वास दिलाने के लिए वह मंत्रालय भी लेकर गयी थी. जहां उसने सचिव स्तर के तीन आईएएस अधिकारियों से मिलवाया गया.’
मोनिका ने यह भी बताया कि श्वेता ने मोनिका को इंदौर से भोपाल आने जाने के लिए एक महंगी कार ऑडी दी थी. हालांकि मोनिका ने भोपाल जाने से इनकार कर दिया था. और वो नरसिंहगढ़ में अपने माता-पिता के घर लौट आयी थी.
इसके बाद आरती दयाल ने मोनिका के घर जाकर उसके माता-पिता को समझाया. और कहा कि अगर वह आपकी बेटी को भोपाल जाती है तो उसका खर्च उसका एनजीओ देगा. इसके बाद मोनिका के घर वाले उसे भोपाल भेजने के लिए तैयार हो गये.
वहां भोपाल में एसएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हनी ट्रैप की एक और मुख्य आरोपी आरती दयाल ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. आरती ने बताया है कि बड़े टेंडर लेने का तरीका उसने श्वेता जैन से सीखा था.
इसके बाद उसने अपनी गैंग में और लड़कियों को जोड़ा. उसने बिजनेस के सिलसिले में इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह से मिलने की बात को भी स्वीकर किया है.
आरोपियों के बैंक अकाउंट से ट्रांजेक्शन पर लगेगी रोक
एक अन्य खबर के मुताबिक हनी ट्रैप गैंग की चारों महिला आरोपियों के बैंक खाते सीज होंगे. इसके लिए अधिकारियों को लेटर लिखा गया है. पुलिस के अनुसार, अभी इन आरोपियों के सभी खातों की जानकारी नहीं मिल पायी है.
एसआईटी की एक टीम को चारों महिलाओं की संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है. इधर पुलिस को पांच कंपनियों और कुछ एनजीओ के नामों की जानकारी मिली है जिनका संचालन इन महिलाओं के हाथ में था.
सेक्स रैकेट को मदद को करने वाले तीन पुलिस कर्मी अरेस्ट
हनी ट्रैप मामले में लड़कियों की मदद करने वाले तीन पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई हुई है. मामले में क्राइम ब्रांच ने केस दर्ज कर तीन पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया है. ये पुलिसकर्मी आरोपी लड़कियों के इशारे पर लोगों से रुपये देने का दबाव बनाया करते थे.
गिरफ्तार पुलिस कर्मियों के नाम सुभाष गुर्जर, अनिल जाट और लाड़ सिंह हैं. दबाव बनाने के सिर्फ इस एक मामले में टीम ने नौ लड़कियों, आठ ग्राहक और तीन ब्रोकर को बुधवार को ही गिरफ्तार किया था.
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