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#Anganwadi सेविकाओं की पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा पिटाई पर हेमंत ने #DGP को लिखी चिट्ठी, मांगे सवालों के जवाब

Ranchi : 24 सितंबर को राजभवन के समीप प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं पर पुलिस के रवैये को लेकर नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने डीजीपी केएन चौबे को पत्र लिखा है.

उन्होंने इस पत्र को अपने ट्वीटर हैंडल पर भी साझा किया है. उन्होंने लिखा है कि वे आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं पर पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई की तरफ ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं. साथ ही वे दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि सेविका-सहायिकाएं 40 दिनों से राजभवन के सामने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं. भूख हड़ताल का भी कार्यक्रम किया. 40 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद जब उनकी बातों को नहीं सुना गया तब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास जाने का निश्चय किया.

इस बीच पुलिस के जवानों द्वारा उनकी लाठी-डंडे से पिटाई की गयी. पुलिस की इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई का वीडियो फुटेज देखने के बाद पुलिस प्रशासन का जो अमानवीय चेहरा सामने आया है, वो स्तब्ध करता है. पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है.

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डीजीपी से मांगे इन सवालों के जवाब

  • महिला प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति क्यों नहीं की गयी थी?

  • किस परिस्थिति में पुरुष पुलिस बल ने महिलाओं पर बर्बतापूर्वक लाठी बरसायी और लात-घूसों से महिलाओं की पिटाई की गयी?

  • लाठी चार्ज करने से पहले की जाने वाली चेतावनी जैसे वाटर कैनन, आंसू गैस का प्रयोग क्यों नहीं किया गया?

  • लाठी चार्ज से घायल महिलाओं की चिकित्सा क्यों नहीं करायी गयी? विदित हो कि लाठीचार्ज से बसंती देवी का हाथ भी टूट गया लेकिन प्रशासन के द्वारा चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी?

  • उक्त बर्बर कार्रवाई के लिए दोषी कौन है?

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राज्य की प्रतिष्ठा को लगा धक्का

पत्र में लिखा है कि इस घटना की शीघ्र जांच कराकर, लाठीचार्ज में शामिल पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाये. साथ ही घटनास्थल पर उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों को भी निलंबित किया जाये. इस कृत्य से राज्य की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है.

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