
Ranchi : मध्यप्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप कांड में रोज ही नये खुलासे हो रहे है. कल रात खबर आयी थी कि मध्य प्रदेश के कॉल गर्ल्स गिरोह की मुखिया का कनेक्शन दिल्ली की मशहूर और महंगी कॉल गर्ल सिमरन से भी था.
सिमरन मध्य प्रदेश के गिरोह को सत्ता के ऊंचे पदों पर बैठे मंत्रियों-नेताओं तक पहुंचाने के लिए नेटवर्क तैयार कर रही थी.
अब इस कड़ी में नयी खबर आ रही है कि सेक्स रैकेट ने मध्यप्रदेश के 13 बड़े और सीनियर आइएस अफसरों को जाल में फंसाने के लिए नेटवर्क किया था.
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रैकेट के पास कुछ आइएएस अफसरों के वीडियो मौजूद
रैकेट के पास कुछ आइएएस अफसरों के वीडियो मौजूद होने की भी जानकारी मिल रही है. इसका जिक्र उस डायरी में है, जिसे पुलिस ने गिरोह के पास से जब्त किया है.
इसमें इन अफसरों को टारगेट बनाने की बात लिखी गयी है. इन अफसरों के सेक्स वीडियो बनाकर इनको ब्लैक मेल करने की तैयारी चल रही थी.
इस लिस्ट में आइएएस अफसरों के नाम कोड में दर्ज किये गये हैं. सेक्स रैकेट का संचालन आरती दयाल, श्वेता जैन, बरखा सोनी और उसकी फ्रेंड्स के द्वारा किया जाता था.
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हनी ट्रैप देश का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल
मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप रैकेट केस में एक और दिलचस्प मोड़ आ गया है. मामले में पांच अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार हुई 18 वर्षीया आरोपी मोनिका यादव सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गयी है.
अब वह इस मामले में मुख्य गवाह होगी. इससे जल्द ही इस ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल केस में कई अहम खुलासे हो सकते हैं.
एक दिन पहले ही मोनिका के पिता ने मानव तस्करी मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी है. उसके बाद मोनिका के सरकारी गवाह बनने की बात सामने आयी है.
इंदौर नगर निगम के अधीक्षण अभियंता हरभजन सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मोनिका के अलावा, आरती दयाल, श्वेता स्वप्निल जैन, श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी और एक ड्राइवर ओमप्रकाश को गिरफ्तार किया था.
इंजीनियर ने आरोप लगाया गया कि एक आरोपी महिला ने उनसे दोस्ती कर एक आपत्तिजनक विडियो बनाया और उसके आधार पर 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी जा रही है.
गौरतलब है कि हनी ट्रैप सेक्स स्कैंडल को देश का अबतक का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल माना जा रहा है. इस रैकेट के केस में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब तक 400 फाइलें तैयार कर चुकी हैं. और ये सिललिला अभी जारी ही है.
हनी ट्रैप के सेक्स रैकेट में चार राज्यों के सीनियर नेता, आइएएस अधिकारी, इंजीनियर और बड़े बिजनेस मैन के नाम सामने आ रहे हैं.
इन लोगों से संबंधित सेक्स विडियो और अश्लील चैट, ब्लैक मेलिंग के प्रूफ, रैकेट के सदस्यों के लैपटॉप और मोबाइल पुलिस पहले बरामद कर चुकी है.
रैकेट पीछे कौन-कौन से लोग
इन जानकारियों के बाद अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के पीछे और कौन कौन लोग हैं. ये पता चल चुका है कि इसको चलाने वाली महिलाएं ही हैं.
जांच एजेंसियां अब इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं कि इसके पीछे और कौन रसूखदार लोग हैं. कौन उन्हें टारगेट फिक्स करके देता था. मामले की जांच फिलहाल एसआइटी को दे दी गयी है.
एसआइटी की टीम को 13 ऐसे आइएएस अफसरों के नाम मिले हैं, जो पिछले कार्यकाल में मत्स्य पालन, कृषि, संस्कृति, उद्योग, शहरी प्रशासन, श्रम, वन, जल संसाधन, जन संपर्क और प्रशासनिक विभागों में काम कर चुके हैं. इससे राज्य के ब्यूरोक्रेट्स में खलबली मच गयी है.
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यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि रैकेट की लड़कियों ने अब तक कितने अफसरों को जाल में फंसाया है. एक जांच अधिकारी ने बताया है कि जब्त वीडियो को देखकर उनकी पहचान की जा रही है.
इसके बाद उनको कारण बताओ नोटिस भेजा जायेगा. बहरहाल, देश का दिल’ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में हनी ट्रैप रैकेट के इस खुलासे ने कई सीनियर मंत्रियों, नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों की नींद उड़ा दी है.
कौन है इस गिरोह की सरगना
अब तक की जांच में यह साफ हुआ है कि सेक्स रैकेट की सरगना श्वेता जैन है. उसके लैपटॉप और मोबाइल से मिले विडियो क्लिप और चैट्स आदि की जांच की जा रही है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसर एक अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह देश में सबसे बड़ा ‘ब्लैकमेलिंग के लिए सेक्स स्कैंडल’ साबित हो सकता है.
बताया जा रहा है कि सेक्स रैकेट से मिल मेमोरी कार्ड की जांच और उससे फोटो तथा वीडियो निकालने के लिए फरेंसिक अफसरों को ओवरटाइम करना पड़ रहा है. अफसरों ने बताया कि जिस तरह से रोज ही मामले सामने आ रहे हैं, उससे लगता है कि डिजिटल फाइलों की संख्या 6000 से भी आगे जा सकती है.
आरोप लगाया गया है कि सैक्स रैकट के जाल में फंसाने वाली लड़कियों का भोपाल के एक मशहूर क्लब में आना-जाना था.
उनके लिए वहां अफसरों की ओर से पहले कमरे बुक होते थे. अब जानकारी आ रही है कि इस क्लब का रजिस्टर ही गायब है. इसमें कई लड़कियां 18 साल की हैं. इन लड़कियों में कोई तो
राजनीतिक रसूख वाली बन गयी थीं. उनकी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने या तो खुद ही पॉलिटिक्स में बड़ा पोस्ट हासिल कर लिया था या उनके परिवार के सदस्यों को इसमें बड़ी जिम्मेदारी मिल गयी थी. कोई NGO के माध्यम से चांदी काट रही थीं तो कोई अफसरों और मंत्रियों को डरा-धमकाकर.
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