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बगैर एमओयू के एक्सटेंशन के ही एनजीओ चला रहे हैं नेत्रहीन, स्पास्टिक और मूक बधिर विद्यालय

Deepak

Ranchi: झारखंड में कई स्वंयसेवी संस्थान बगैर एमओयू के ही नेत्रहीन, स्पास्टिक और मूक बधिर विद्यालय चला रहे हैं. इन संस्थानों के साथ राज्य सरकार ने 2012-13 में विशेष विद्यालय चलाने के लिए एमओयू किया था. उसके बाद से न तो उसका एक्सटेंशन हुआ है और न ही इन्हें चलाने की सरकार के तरफ से किसी तरह की अनुमति दी गयी है. 2012-13 में महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से नेत्रहीन विद्यालय के लिए देवघर और गोड्डा में लोहिया विकलांग सेवा समिति, गोड्डा, गुमला में मुक्ति संस्थान, दुमका में सर्वांगीन विकलांग विकास केंद्र, गिरिडीह में सामाजिक समस्या निवारण एवं कल्याण संस्थान के साथ समझौता किया था.

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कई संस्थानों के साथ हुआ था समझौता

स्पास्टिक विद्यालय के लिए हजारीबाग में सामाजिक समस्या निवारण एवं कल्याण केंद्र, गुमला में मुक्ति संस्थान, रामगढ़ में रजरप्पा विकलांग सेवा समिति, रांची में चैशायर होम और दीपशिखा, देवघर में श्रुति ट्रस्ट, गोड्डा में लोहिया विकलांग सेवा समिति तथा हजारीबाग में जन जागरण केंद्र बरही के साथ समझौता हुआ था. इसी तरह डेफ एंड डंब स्कूल के लिए भी कमोबेश इन्हीं संस्थानों के साथ समझौता किया गया था. 2013-14 के बाद से किसी भी एजेंसियों के साथ सरकार ने समझौते का नवीकरण नहीं किया. मुक्ति संस्थान के संजय दत्ता के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से कभी समझौते के नवीकरण का आदेश नहीं दिया गया. हां, उपायुक्तों से यह कहा गया था कि बेहतर क्रियान्वयन करनेवाली एजेंसियों को आधारभूत संरचना के लिए मदद की जाये. मुक्ति संस्थान की तरफ से गुमला में एक ही जगह पर तीनों विद्यालय चलाये जा रहे हैं.

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संस्थानों को 14-15 लाख रुपये का मिलता है अनुदान

विशेष विद्यालय चलानेवाले संस्थानों को सरकार की तरफ से न सिर्फ आधारभूत संरचना दी जाती है, बल्कि इन्हें छात्रावास में रहनेवाले बच्चों के लिए भोजन, पाठ्य-पुस्तक सामग्रियां, शिक्षकों का मानदेय और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं. सभी विद्यालयों में 50-55 बच्चे अध्य्यनरत होने की दर से 15 लाख रुपये का सरकारी अनुदान दिया जाता है. जहां 15 से 20 बच्चे हैं, उन्हें 9 लाख से 12 लाख रुपये तक का अनुदान सरकार की तरफ से दिया जाता है.

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क्या कहते हैं नि:शक्तता आयुक्त

राज्य के नि:शक्तता आयुक्त सतीश चंद्र ने कहा है कि सभी स्वंयसेवी संस्थानों से सरकार के साथ हुए समझौते की वस्तुस्थिति पर रिपोर्ट मांगी जायेगी. उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च को एनजीओ की तरफ से मनमाने ढंग से व्यय किया जा रहा है. इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि दुमका, गुमला, देवघर और अन्य जगहों पर स्वंयसेवी संस्थानों के संचालकों द्वारा बच्चों के साथ मारपीट किये जाने और भोजन समय पर नहीं दिये जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं. इस पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पायी है. जिलों के एसपी और उपायुक्तों से भी रिपोर्ट तलब करने की कोशिशें की जा रही हैं.

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