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राज्य में ऑनलाइन म्यूटेशन सिस्टम हुआ फेल, 45609 आवेदन हैं लंबित

गिरिडीह में 5616 आवेदन 89 दिनों से हैं पेंडिंग, रांची में 1186 आवेदन आपत्ति के साथ धूल फांक रहे अंचल में

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Pravin Kumar

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Ranchi: जमीन के म्यूटेशन में आनेवाली अड़चनों को दूर करने के लिए राज्य के कुछ अंचलों में ऑनलाइन म्यूटेशन सिस्टम 2014-15 से शुरू किया गया, जिसे बाद में पूरे राज्य में लागू किया गया. प्रयोग के तौर पर झारखंड में सबसे पहले रांची जिले के इटकी अंचल से ऑनलाइन म्यूटेशन की शुरुआत 2013 में की गयी. ऑनलाइन म्यूटेशन सिस्टम होने के बाद भी म्यूटेशन में विलंब होने से लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ती जा रही है. राज्य में सबसे अधिक म्यूटेशन रांची जिला में लंबित है, जहां इसकी संख्या 9472 है. फिलहाल राज्य भर में 45,609 मामले लंबित हैं. इन मामलों में 30 दिन से अधिक और 90 दिन से कम के मामले 28,699 हैं. साथ ही 90 दिन से अधिक आपत्ति के साथ लंबित मामलों की संख्या 3056 है. 2014 -15 से राज्य में कुल म्यूटेशन के लिए 4,17,401 आवेदन आये, जिनमें 1,96,609 आवेदनों का निष्पादन किया गया. 2014-15 से आज तक 1,87,940 आवेदन को भूमि का सही दस्तावेज नहीं होने के कारण रिजेक्ट किया गया है. या फिर इनमें वैसे मामले भी हैं जिनमें जमीन किसी और की थी जिसे किसी अन्य के द्वारा बेच दी गयी या फिर एक ही जमीन की कई बार अलग-अलग लोगों को राजिस्ट्री करा कर म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया गया.

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राज्य में दखिल खरिज के मामले हैं लंबित

18 अंचलों में ऑनलाइन म्यूटेशन के करीब 3600 मामले लंबित हैं. लोग अंचल ऑफिस की दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन म्यूटेशन के चक्कर में उनकी जमीन का दाखिल-खारिज लटका हुआ है. तकनीकी अड़चन और विभाग के  कर्मचारियों के क्रियाकलापों के कारण म्यूटेशन के लंबित मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. रांची जिला के विभिन्न अंचलों में जमीन के म्यूटेशन के लिए कई लोगों ने एक साल पहले आवेदन दिया था, लेकिन अभी तक उनका मामला पेडिंग है. जब ऑनलाइन म्यूटेशन की शुरुआत हुई, तो उम्मीदें जगीं कि म्यूटेशन के लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो जायेगा. लेकिन, ऑनलाइन म्यूटेशन में आ रही तकनीकी अड़चन के कारण म्यूटेशन के लंबित आवेदन की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है. म्यूटेशन के लिए अप्लाई करने के बाद लोगों को सीओ ऑफिस से कोई समय भी नहीं मिलता. जिस वजह से आवेदक को यह मालूम नहीं होता की कब उनकी जमीन का म्यूटेशन होगा.

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25 दिनों में होना है म्यूटेशन

अंचल ऑफिस में आवेदन जमा होने के 25 दिनों के अंदर जमीन का म्यूटेशन हो जाना चाहिए. लेकिन, यह नहीं हो रहा है.

राज्य में म्यूटेशन का क्या है प्रक्रिया

सबसे पहले म्यूटेशन से संबंधित आवेदन अंचल ऑफिस में जमा करना होता है. अंचल की ओर से डाटा एंट्री के बाद टोकन जारी किया जाता है. फिर आवेदन संबंधित हल्का कर्मचारी के पास भेजा जाता है. हल्का ऑफिस में जमीन से संबंधित सारे दस्तावेज की जांच होती है. हल्का कर्मचारी की रिपोर्ट सीआइ के पास भेजी जाती है. सीआइ के थ्रू होते हुए पेपर सीओ के पास आता है. सीओ के हस्ताक्षर के बाद करेक्शन स्लिप जारी किया जाता है. वहीं राज्य के कई अंचलों में इंटरनेट और कंप्यूटर पर्याप्त उपलब्ध नहीं होने के कारण म्यूटेशन में दिक्कतें होती हैं.

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राज्य में म्यूटेशन के लंबित मामले हैं 45609

बोकारो -1873, चतरा-678 दुमका -133, देवघर -650, धनबाद -5088, गोड्डा-28, गढ़वा -2274, गिरिडीह-6765, गुमला-717, हजारीबाग-3866, जमताड़ा-22, कोडरमा-1880, खूंटी-576, लातेहार -825,लोहरदगा -304, पूर्वी सिंहभूम-1269, पश्चिम सिंहभूम-646, पाकुड़ -3108, पलामू -2473, रांची-9472,  रामगढ़-743, सरायकेला-खरसावां-1971 साहेबगंज -553, सिमडेगा-295

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30 दिनों से अधिक लंबित मामले हैं 28699

30 दिन से अधिक और 90 दिन से कम के आवेदन लंबित रहने के मामले में गिरीडिह जिला पहले स्थान पर है. इसके बाद रांची और धनबाद जिला में लंबित आवेदन की संख्या अधिक है.

बोकारो -157, चतरा-285, दुमका -88, देवघर -390, धनबाद -3702, गोड्डा-13, गढ़वा -1723, गिरिडीह-5616, गुमला-579, हजारीबाग-2989, जामताड़ा-13, कोडरमा-416, खूंटी-349, लातेहार -650, लोहरदगा -120, पूर्वी सिंहभूम-756, पश्चिम सिंहभूम-312, पाकुड़ -2515, पलामू -1071, रांची-4958,  रामगढ़-279, सरायकेला-खरसावां-983 साहेबगंज -471, सिमडेगा-164

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तीन महीन से अधिक लंबित म्यूटेशन के मामले 3056

राज्य में विवादित भूमि की खरीद फरोख्त के अधिकतर मामले पेडिंग रखे गये हैं. अंचल की ओर से ऐसे मामलों को आपत्ति के साथ पेडिंग में रखा गया है. ऐसे मामलों को रिजेक्ट नहीं किया गया है. ऐसे मामले में रांची जिला सबसे अव्वल है. 1186 मामले पिछले कई महीनों से लंबित हैं. वहीं गिरिडीह,  रामगढ़, हजारीबाग और बोकारो जिला में भी ऐसे मामलों की संख्या अधिक है. जामताड़ा ऐसा जिला है जहां तीन महीने से अधिक लंबित एक भी मामला नहीं है.

बोकारो -194, चतरा-11, दुमका -3, देवघर -45, धनबाद -50, गोडडा-4, गढ़वा -111, गिरिडीह-318, गुमला-3, हजारीबाग-292, जमताड़ा-0, कोडरमा-134, खूंटी-60, लातेहार -12, लोहरदगा -52, पूर्वी सिंहभूम-38, पश्चिम सिंहभूम-54, पाकुड़ -30, पलामू -82, रांची-1186,  रामगढ़-217, सरायकेला-खरसावां-134 साहेबगंज -7, सिमडेगा-19

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