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बड़ा तालाब में खड़ी कंक्रीट की दीवार से ग्राउंड वाटर रिचार्ज हुआ बंद

Ranchi :   रांची नगर निगम के अंतर्गत मुख्य तालाबों पर सौंदर्यीकरण का काम जारी है. इन तालाबों का सौंदर्यीकरण पिछले एक साल पहले से ही किया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन का दावा है कि ऐसा होने से राजधानी को खूबसूरती काफी बढ़ जाएगी. लेकिन इस दावे से अलग रविवार को रांची के कई तालाब आज सौंदर्यीकरण की भेंट चढ़ रहे हैं.  रांची लेक यानि बड़ा तालाब और करमटोली तालाब की स्थिति काफी खरीब है. इन तालाबों के किनारे पर कंक्रीट की दीवार खड़ी की जा रही है. जिससे अब यह बर्बादी की कगार पर है.

उपरोक्त दोनों के अलावा राजधानी के अन्य तालाब जैसे कि जोड़ा तालाब, बनस तालाब, दिव्यायन तालाब, चुटिया तालाब, अरगोड़ा तालाब, मधुकम तालाब, जेल तालाब में भी सौंदर्यीकरण का काम हुआ है. सौंदर्यीकरण के पहले ये सभी गर्मी में भी नहीं सूखते थे. लेकिन सौंदर्यीकरण के बाद ये तालाब सूखने लगे हैं. इसका कारण है कि पानी सोखने की क्षमता रखने वाले इन तालाबों को कंक्रीट से घेरने का काम तेजी से हुआ. ठीक यही स्थिति आज बड़ा तालाब और करमटोली तालाब की भी होने जा रही है. उसका परिणाम आसपास के ग्राउंड वाटर लेबल पर पड़ रहा है.

बरसात के पानी को रोकना हुआ मुश्किल

सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाबों को कंक्रीट की दीवार से घेरना शुरू किया गया है. जबकि बरसात के पानी को स्टोर करने या रोकने का किसी ने भी कोई उपाय नहीं किया. इससे कभी तालाबों का शहर रांची अब कंक्रीट में बदलने लगा है. पानी का ग्राउंड लेबल लगातार नीचे होता जा रहा है. करमटोली तालाब और बड़ा तालाब को घेरने के कारण आज इन इलाकों में तो पानी का लेबल 400 फीट तक चला गया है.

जल बोर्ड के मुताबिक, बरियातू में 200 से 250 फीट, हरमू में 200 से 300 फीट, धुर्वा और तुपुदाना में 300 से 400 फीट, रातू रोड में 400 से 500 फीट की गहराई तक लोगों को बोरिंग का पानी मिल पा रहा है. वहीं कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां ग्राउंड वाटर की स्थिति बहुत खराब हो गयी है. जहां 500 फीट बोरिंग के बाद भी पानी नहीं आ पाता है.

यदि कहीं निकलता भी है, तो छह माह से एक वर्ष के भीतर ही बोरिंग फेल हो जाता है.कांके रोड, मोरहाबादी, लालपुर, बरियातु, रातू रोड, मधुकम, विद्यानगर, हिंदपीढ़ी, अरगोड़ा जैसे इलाके इस जोन में तब्दील होने लगे हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रातू रोड और हिंदपीढ़ी के इलाके हैं. यहां रहने वाले लोग सप्लाई के पानी पर ही निर्भर हैं. पानी की समस्या को देख केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण ने भी गहरी चिंता जतायी है.

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कभी 80 की संख्या में थे तालाब, आधे हो गये खत्म

तालाबों के सोंदर्यीकरण का असर इन तालाबों पर काफी पड़ा है. 1980 के आसपास राजधानी के बीचोंबीच करीब 84 की संख्या में तालाब हुआ करते थे. लेकिन आज तालाबों की संख्या तीन दर्जन के करीब ही रह गयी है. एक सर्वे के मुताबिक, शहर में फिलहाल करीब 33 सरकारी और 7 निजी तालाब बचे हैं.

इसमें प्रमुखता से बड़ा तालाब, कडरू बस्ती तालाब, मधुकम बस्ती तालाब, लाइन टैंक तालाब, करमटोली तालाब, हटनिया तालाब, हातमा-एदलहातू तालाब, अरगोड़ा तालाब, हिंदपीढी स्थित छोटा तालाब, मोरहाबादी दिव्यांग तालाब, तिरिल बस्ती तालाब, बरियातू स्थित जोड़ा तालाब, चुटिया स्थित हटिया तालाब और बनस तालाब, धुर्वा स्थित शहीद मैदान और धुर्वा डैम, जगन्नाथपूर मंदिर तालाब, कांके डैम, डोरंडा स्थित बटन तालाब, डोरंडा ग्वाला टोली तालाब हैं.

बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण से प्रभावित होंगे आसपास के लोग

सरकारी तालाबों के संरक्षण के लिए नगर निगम ने सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की थी. अभी तक छोटे-छोटे करीब 10 तालाबों के सौंदर्यीकरण पर 18 करोड़ रुपए खर्च हो गए. बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण पर भी करीब 14 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. तालाबों की बर्बाद होती स्थिति का सबसे बड़ा उदाहरण बड़ा तालाब है. तालाब के संरक्षण के नाम पर कंक्रीट की दीवार खड़ी करने से तालाब में पानी का प्राकृतिक स्त्रोत आना बंद हो गया.

हाल में तालाब के बीचो-बीच स्थित वर्षों पुराने टापू पर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित की गई. वहां तक पहुंचने के लिए ब्रिज बनाया गया. अब नगर निगम की ओर से तालाब के चारों ओर पाथ वे बनाया जा रहा है. कंक्रीट की संरचना बनाकर पाथ वे को ढ़ाला जा रहा है. पाथ वे की वजह से तालाब में जाने वाले बारिश के पानी पर भी संकट आ गया है. क्योंकि रोड से पाथ वे को करीब 3 फुट तक ऊंचा कर दिया गया है. इस वजह से बारिश का जो पानी बहकर तालाब में जाता था, वह नहीं जाएगा. तालाब में पानी कम होने का खामियाजा आने वाले समय में अपर बाजार सहित लेक रोड के लोगों को भुगतना पड़ेगा. क्योंकि तालाब की वजह से ग्राउंड वाटर रिचार्ज रहता है.

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