
London : सोमवार को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को लंदन की अदालत से बड़ा झटका मिला है. खबरों के अनुसार माल्या के प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ दायर याचिका अदालत ने खारिज कर दी है. बता दें कि इससे पहले माल्या ने अपने प्रत्यर्पण को ब्रिटिश गृह मंत्री साजिद जाविद द्वारा बीते फरवरी महीने में दी गयी मंजूरी के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी. चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनॉट ने माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी देते हुए अपने फैसले में कहा था कि उनके खिलाफ कर्ज धोखाधड़ी के पर्याप्त सुबूत हैं और प्रथमदृष्टया पाया कि माल्या बैंकों से धोखाधड़ी की साजिश में शामिल थे.
विजय माल्या पर 9 हजार करोड़ रुपये की कर्ज अदायगी न करने का आरोप है. जान लें कि माल्या गिरफ्तारी के डर से मार्च 2016 में भारत से लंदन भाग गया था. जानकारी के अनुसार विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई का लुकआउट नोटिस कमजोर किया गया था इसी का फायदा उठाकर वह लंदन भाग गया था. विजय माल्या इस वक्त लंदन में है और लंदन की अदालत भी उसके प्रत्यर्पण के लिए मंजूरी दे चुकी है. बता दें कि कोर्ट ने माल्या की लिखित अपील को खारिज कर दिया है. इसके बाद मौखिक सुनवाई होगी.
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PMLA कोर्ट ने पिछले दिनों ही भगोड़ा घोषित किया था
9000 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारतीय एजेंसियां लंबे समय से प्रयास कर रही थीं. बैंकों का लोन लेकर फरार चल रहे शराब कारोबारी विजय माल्या को PMLA कोर्ट ने पिछले दिनों ही भगोड़ा घोषित किया था. विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका पर आज फैसला आया है. PMLA कोर्ट के बाद माल्या नये कानून के तहत देश का पहला आर्थिक भगोड़ा बन गया.
बता दें कि कोर्ट ने इस फैसले को 26 दिसंबर 2018 को 5 जनवरी 2019 तक के लिए सुरक्षित रखा था. माल्या ने पीएमएलए कोर्ट ने दलील थी कि वह भगोड़ा अपराधी नहीं है और न ही मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल है. इससे पहले विजय माल्या ने दिसंबर महीने में आग्रह किया था कि उसे आर्थिक भगोड़ा अपराधी घोषित करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के जरिये शुरू की गयी कार्रवाई पर रोक लगाई जाये.




