
Ranchi: पलायन रोकने के लिये केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अलग अलग योजनाएं चलायी जाती है. जिससे ग्रामीण विशेषकर आदिवासियों का पलायन तो रूके ही, साथ ही इन्हें रोजगार भी मिले. ऐसी ही एक योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना है. जिसके तहत ग्रामीणों के रोजगार सृजन पर कार्य किया जाना था. योजना साल 2017 की है. अब इसमें गड़बड़ियां सामने आने लगी है. सिमडेगा के जलडेगा प्रखंड में योजना के तहत ऐसी ही गड़बड़ियां सामने आयी. जहां योजना के लिये चयनित एजेंसियों ने बगैर किसानों को योजना का लाभ दिए लाखों रूपये की राशि डकरा ली है.
150 किसानों को मिलना था य़ोजना का लाभ
जिले में योजना का संचालन समेकित जनजातीय विकास अभिकरण (आईटीडीए) की ओर से किया गया. जलडेगा के लिये 19 लाख 50 हजार की लागत से 150 किसानों के 150 एकड़ जमीन पर लगभग 60 हजार पौधे लगने थे. इस कार्य के लिये चार एजेंसियों का चयन किया गया. लेकिन योजना के पांच साल पूरे हो जाने पर भी किसानों की जमीन पर न तो पौधे नजर आते है और न ही किसानों को इसका लाभ मिला. योजना केंद्रीय सहायता एससीए और टीएसपी योजना मद के संचालित किया जाता है. योजना के तहत किसानों को पौधरोपण का प्रशिक्षण और बोरिंग की सुविधा भी एजेंसियों को ही देनी थी.
किन किन एजेंसियों को मिला था काम
योजना साल 2017-18 की है. साल 2020 में कोविड के कारण योजना दो साल लंबित रही. जिसके बाद साल 2022 में फिर से इस पर कार्य शुरू किया गया. इस कार्य के लिये सपोर्ट संस्था हजारीबाग को लमडेगा पंचायत के परबा लमडेगा और भीतबुना में काम दिया गया. आदित्य विकास समिति को कुटुंगीया पंचायत के दो गांव में काम मिली. भारतीय लोक कल्याण संस्थान रांची को कुटुंगीया पंचायत के रामजड़ी पुंडीदीरी और जाम टोली में काम दिया गया.
इन एजेंसियों की ओर से ही गांवों में चिन्हित जमीन के समीप बोरिंग किया जाना था. बोरिंग के लिये पाईपलाइन की आपूर्ति के लिये श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड रायपूर को पाईप सप्लाई की जिम्मेवारी थी. ग्रामीणों से बात करने से जानकारी होती है कि कुछ कुछ इलाकों में बोरिंग तो किया गया. लेकिन धरातल पर योजना नजर नहीं आती है. एजेंसी की ओर से किसी भी खेत में पाईपलाइन से पानी की व्यवस्था नहीं की गयी.
क्या काम करती एजेंसियां
विभागीय डीपीआर के अनुसार प्रत्येक एजेंसी को प्रत्येक गांव में 25-25 एकड़ और 25-25 किसानों का दो क्लस्टर निर्माण करना था. प्रत्येक संस्था को 50 किसानों के साथ उनके 50 एकड़ जमीन पर कृषि का कार्य करना था. इसके अलावा सिंचाई के लिए प्रत्येक क्लस्टर में एक डीप बोरिंग करना और किसानों को प्रशिक्षण देकर पूरे जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक का जाली और बांस से मजबूती घोराव करना था और प्रत्येक एजेंसी को बीस हजार पौधा लगाना था.
ग्रामीणों की मानें तो एजेंसियों ने कलस्टर निर्माण तो किया, लेकिन किसानों को न ही प्रशिक्षण दिया गया. और न ही योजना तहत मिलने वाले कीटनाशक और बीज ही दिये गये. ग्रामीणों की मानें तो किसानों ने अपने बीज से कुछ खेती की लेकिन उचित प्रशिक्षण नहीं मिलने के कारण फसल बर्बाद हो गयी.
प्रत्येक किसान को तीन हजार रूपये के बीज
तीनों एजेंसियों को अपने अपने क्लस्टर के प्रत्येक किसान को 200 किलो वर्मी कम्पोस्ट, एनपीके 50 किलो, वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर 10 किलो, बायोफर्टिलाइजर कीट, प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये का बीज के अलावा प्रत्येक किसान को 100 मुनगा, 100 पपीता, 100 अमरूद और 100 इमारती पौधा भी दिया जाना था. और किसानों के जमीन को समय समय पर हल जोतवाकर उसमे इंटरक्रॉपिंग कराना था.
विधायक का आश्वासन नहीं आया काम
इस मामले में जब किसानों को एजेंसियों की लापरवाही की जानकारी हुई तो किसानों ने ग्राम सभा बुलायी. जिसके बाद कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी से मिलकर किसानों ने मामले की शिकायत की. मामले को गंभीरता से लेकर विधायक ने रामजड़ी गांव में बैठक कर ग्रामीणों को आश्वासन दिया था की वे इस मामले को विधानसभा में उठाकर इस पर जांच कराएंगे.
पैसे का हुआ दुरूपयोग: मुखिया
इस मामले में लमडेगा मुखिया बिपिन बडिंग ने कहा कि पंचायत के परबा लमडेगा एवं भितबुना में सपोर्ट संस्था द्वारा योजना चलाया गया था. लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में ना ही पानी मिला ना ही किसानों को कोई प्रशिक्षण देकर खेती कराया गया. आज धरातल पर कुछ भी नही है कुल मिलाकर सरकारी पैसों का दुरुपयोग हुआ है.




