
Ranchi : ईसाई संगठनों द्वारा हाल की बैठकों में लिया गया यह निर्णय कि किसी गठबंधन के साथ न जा कर उम्मीदवार विशेष को देखते हुए वोट करना है, ने विपक्षी दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है.
बता दें कि दक्षिणी छोटानागपुर की सात विधानसभा सीटों पर निर्णायक वोटर के रूप में ईसाइयों की उपस्थिति है जहां इनकी संख्या अन्य समुदायों से अधिक या बराबर है.
इनमें रांची, खूंटी, तोरपा, सिमडेगा, कोलेबिरा, गुमला, लोहरदगा, सिसई विधानसभा क्षेत्र प्रमुख हैं. इसके अलावा अन्य जनजातीय इलाकों में भी ईसाई वोटरों की संख्या हार-जीत में निर्णायक बन जाती है.
ईसाई संगठनों का मानना है राजनीतिक दलों द्वारा उन्हें वोट बैक की तरह प्रयोग किया जाने लगा है. उनकी राय है कि बड़े विपक्षी दला जैसे कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा ईसाई समुदाय की बातों को अनसुना किया जा रहा है.
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चुनाव को लेकर ऑल चर्चेस कमेटी कई गुटों में बंटी
कई बार चुनाव में चर्च के एजेंडों व राजनीतिक समीकरण में हस्तक्षेप से चुनावी माहौल भी गर्म हो जाता है. लोकसभा चुनाव के दौरान यह देखने को मिला था.
लेकिन राजनीतिक दलों के रवैये से नाराज ईसाई समुदाय ने उम्मीदवार को देख वोट करने का मन बनया है.
झारखंड में ईसाई समुदाय की संख्या करीब 13 लाख है. विस चुनाव में इस बार चर्च की भूमिका पार्टी विशेष के अनुसार न होकर क्षेत्रानुसार हो गयी है.
ऑल चर्चेस कमेटी हो या झारखंड चर्चेस काउंसिल, सभी ने उम्मीदवार देख कर निर्णय करना तय किया है कि वोट किसे देना है. इससे चर्च का वोट भी विभिन्न राजनीतिक दलों में बंटता दिख रहा है.
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ऑल चर्चेस कमेटी में कौन-कौन हैं कलीसिया
ऑल चर्चेस कमेटी से जुड़े पदाधिकारियों ने भी किसी दल विशेष को लेकर मतदान से इनकार किया. बल्कि उन्होंने कहा कि उम्मीदवार देख कर लोग अपने मत का प्रयोग सोच समझ कर करेंगे जिससे राज्य का भला हो.
ऑल चर्चेस कमेटी में रोमन कैथोलिक चर्च, सीएनआई चर्च, जीईएल चर्च, एनडब्ल्यू जीईएल चर्च, एजी चर्च, मारथोमा चर्च, पेंटीकोस्टल चर्च, बिलिवर्स चर्च, मेनोनाइट चर्च, मेथोडिस्ट चर्च, ऑथोडॉक्स चर्च व अन्य कलीसिया शामिल हैं.
सबसे बड़ी चर्च कलीसिया के रूप में कैथोलिक रांची आर्च डायसिस है. चर्च के 2017 की जनगणना के अनुसार आबादी 3,618,032 है. जबकि दूसरी बड़ी कलीसिया जीईएल चर्च की आबादी 2,23,878 है. इसके अलावा 60-80 हजार की संख्या अन्य चर्च कलीसिया की है.
क्या कहते हैं महासंघ के अध्यक्ष
राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की कहते हैं कि संगठन काम कर रहा है विधानसभा चुनाव में, लेकिन किसी दल विशेष के साथ महासंघ खड़ा नहीं है बल्कि उम्मीदवार के साथ खड़ा है.
वैसे उम्मीदवारों के समर्थन की बात है जो पूरी तरह जल, जंगल, जमीन की लड़ाई एवं आदिवासी मूलवासियों के अधिकार के स में खड़ा रहा हो.
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