JharkhandLead NewsRanchi

मिशन-2024 : भाजपा की आदिवासी और कुर्मी वोटरों पर नजर, फायरब्रांड महतो नेता की तलाश

Gyan Ranjan

Ranchi: वर्ष 2024 में होनेवाले आमचुनाव को लेकर अभी से ही सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. सांगठनिक स्तर पर कैसे पार्टी को पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाय इसको लेकर भी रणनीति बनायी जा रही है. भाजपा और कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर मिशन 2024 पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. झारखंड में 7 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मिशन 2024 का बजाब्ता शंखनाद कर दिया है. अमित शाह ने झारखंड के अपने 17 घंटे के प्रवास में राज्य में संगठन के नब्ज को तो टटोला ही, पार्टी को कई अहम टास्क भी देकर गए हैं. पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले मतों की समीक्षा की. जानकारी के अनुसार उन्होंने अल्प समय में आंशिक तौर पर बूथवार प्रदर्शन का आकलन किया और पार्टी पदाधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए. भाजपा का मिशन 2024 में झारखंड में आदिवासी और कुर्मी  वोटरों पर फोकस रहेगा. यह बात तो चाईबासा में अमित शाह के भाषण से भी साफ है.

यह भी जानकारी मिल रही है कि भाजपा को पार्टी में एक फायरब्रांड कुर्मी नेता की तलाश है. पार्टी इस तलाश में है कि एक ऐसा कुर्मी नेता हो जिसे आगे कर वह एक बड़ी आबादी को चुनाव में साध सके. पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाय तो भाजपा को राज्य के 14 लोकसभा सीटों में 11 सीटों पर जीत मिली थी और एक सीट उसकी सहयोगी पार्टी आजसू के खाते में आई थी. जाहिर है कि उस समय भाजपा को कुर्मी वोटरों का साथ मिला था. लेकिन विधानसभा चुनाव में कुर्मी बहुल क्षेत्रों में भाजपा को काफी नुक्सान हुआ था. वजह भी साफ़ है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा का आजसू से गठबंधन था और विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन नहीं हो सका था.

कई लोकसभा सीटों पर कुर्मी वोटरों का है दबदबा

झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से देखा जाय तो पांच सीटों पर कुर्मी वोटरों का दबदबा है. रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह और धनबाद लोकसभा सीट ऐसे हैं जहाँ कुर्मी वोटर किसी भी दल के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. उसमे भी यदि इन सीटों पर आदिवासी वोटरों का साथ मिल जाय तो कहानी ही अलग हो सकती है. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी आजसू के खाते में यह पांचों सीटें गयी थी. जीत का मार्जिन भी बहुत अच्छा था. लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को इन लोकसभा सीटों पर काफी नुकसान उठाना पड़ा था. यही वजह है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व कुर्मी और आदिवासी वोटर पर फोकस कर रही है.

विधानसभा की 26 और लोकसभा की 2 एसटी सीटों पर भाजपा को मिली थी हार

पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव की बात की जाय तो भाजपा को एसटी के लिए आरक्षित सीटों पर नुकसान उठाना पडा था. झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों में से 5 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. इन पांच सीटों में तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी और 2 सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा था. जिन तीन सीटों पर जीत मिली थी उसमें जीत का मार्जिन कुछ हजार था. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा किसी तरह अपनी सीट बचाने में आम्याब हुए थे. उसी तरह सुदर्शन भगत को भी लोहरदगा से जीत के लिए नाकों चने चबाने पड़े थे. दुमका में भी कमोबेस यही हाल था. विधानसभा में एसटी के लिए आरक्षित 28 सीटों में भाजपा को मात्र दो सीटों पर जीत मिली थी. कोल्हान में तो भाजपा का सूपड़ा ही साफ़ हो गया था.

खरमास बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुर्मी नेता को मिल सकती है जगह

झारखंड से अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो चेहरे हैं. खरमास के बाद जानकारी मिल रही है कि मोदी 2.0 का आखिरी विस्तार होनेवाला है. चर्चा यह है कि झारखंड से मोदी कैबिनेट में किसी कुर्मी सांसद को मौका मिल सकता है. झारखंड से दो कुर्मी सांसद हैं. भाजपा के विद्युत्वरण महतो और आजसू से चंद्रप्रकाश चौधरी. अमित शाह की चाईबासा में हुई सभा में जिस तरह से पार्टी ने विद्युतवरण महतो के आगे कर रखा था उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि इस बार उनकी किस्मत खुल सकती है. कोई बड़ी बात नहीं कि भाजपा इन्हें ही कुर्मी नेता के रूप में झारखंड में आगे बढाए. गौरतलब है कि विद्युत्वरण महतो झामुमो से भाजपा में आये हैं. उनकी कुर्मी समुदाय में पकड़ है ऐसा बताया जाता है. झारखंड आन्दोलन के समय इन्होनें निर्मल महतो, सुधीर महतो, शैलेन्द्र महतो के साथ काम किया है. इनकी पहचान एक आन्दोलनकारी के तौर पर है.

इसे भी पढ़ें: New Delhi: केंद्र ने 651 जिलों में नए जन औषधि केंद्र खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

Related Articles

Back to top button