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गिरिडीहः नेटवर्किंग कंपनी ने पंखा और किट बनाने का प्रशिक्षण देने के नाम पर युवाओं से की ठगी

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Giridih:  दिल्ली की एक नेटवर्किंग कंपनी के फर्जीवाडे का खुलासा गिरिडीह में रविवार की शाम उस वक्त हुआ जब कंपनी के ब्रिकीकर्ता परमेशवर प्रजापति एक अन्य ब्रिकीकर्ता प्रभात कुमार के माध्यम से बिहार के गया के राजभर गांव निवासी गोपाल मांझी के परिजनों को यह कहकर फोन कराया कि गोपाल का एक्सीडेंट हो गया है.

वह गिरिडीह के एक नर्सिंग होम में आईसीयू में भर्ती है. गोपाल के परिजनों को फोन करने वाले ब्रिकीकर्ता प्रभात कुमार ने फोन कर यह भी कहा कि इलाज में 40 हजार का खर्च है. इसलिए गोपाल के पिता सारा नगद लेकर गिरिडीह पहुंचे. बेटे के एक्सीडेंट की जानकारी मिलने के बाद गोपाल के पिता उमेश मांझी राजबर गांव के सत्येंद्र कुमार के साथ रविवार को गिरिडीह के सिहोडीह पंचायत सचिवालय पहुंचे, तो कंपनी के नेटवर्किंग फर्जीवाडे का उद्भेदन हुआ.

इस दौरान सिहोडीह के मुखिया संदीप शर्मा और वार्ड पार्षद अशोक राम ने मामले की जानकारी मुफ्फसिल थाना पुलिस को दी. इसके बाद पुलिस ने करीब एक दर्जन ब्रिकीकर्ता को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया.

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बिहार के युवाओं को भी ठगा

सिहोडीह पहुंचे गोपाल मांझी के परिजनों और सत्येंद्र कुमार ने स्थानीय मुखिया और वार्ड पार्षद से संपर्क किया. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. दरअसल, दिल्ली की कंपनी के उत्पादनों की एजेंसी लेने वाले बिहार के नवादा निवासी सुधा रंजन ने कंपनी का उत्पाद बेचने के लिए गिरिडीह को चुना था. जिसकी स्वीकृति कंपनी ने भी दी. सुधा रंजन को ब्रिकीकर्ताओं की जरुरत हुई. इसके बाद सुधा रंजन का संपर्क लातेहार के परमेशवर प्रजापति से हुआ. परमेशवर प्रजापति ने सुधा रंजन के कहने पर बिहार के गया, जमुई और झारखंड के चतरा के इन युवाओं से संपर्क किया.

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ये है पूरा मामला

इस दौरान परमेशवर का संपर्क रेणु भारती, कोलेश कुमार, मनोज भारती, गोपाल कुमार, अजय कुमार, गोपाल मांझी, अरविंद कुमार समेत कई युवाओं से हुआ. इनमें से किसी युवा से 18 हजार तो किसी से 16 हजार कई युवाओं से 14-15 हजार रुपये तक यह कहरकर नगद लिया गया. इनको कहा गया कि कंपनी की ओर से  मोबाइल, पंखा और कूलर बनाने के कीट का प्रशिक्षण दिया जायेगा.

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लेकिन जितने युवाओं से नगद रुपये लिये गये, उनलोगों को कंपनी के उत्पाद बेचने में लगा दिया गया. लिहाजा, एजेंसी संचालक और मुख्य ब्रिकीकर्ता परमेशवर को नगद रुपये देने के बाद युवाओं की मजबूरी हो गयी. परमेशवर प्रजापति ने इन युवाओं को रहने के लिए सिहोडीह में एक मकान भी ढूंढ दिया. जहां दर्जन भर युवा रहकर करीब दो सप्ताह से सिहोडीह और शास्त्री नगर के घर-घर में कंपनी के हर्बल उत्पादों की ब्रिकी कर रहे थे.

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