
Ranchi. कोरोना संक्रमण के समय में प्राइवेट हॉस्पिटल में सेवा लेना लोगों को महंगा पड़ रहा है. इलाज के बाद बिल का भुगतान नहीं करने पर रोगियों और परिजनों को बंधक बनाये जाने की भी शिकायत आ रही है. एक दिन की सेवा के लिये भी लोगों को 60,000 से 80,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.
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प्रदेश भाजपा ने राज्य सरकार से निजी अस्पतालों पर लगाम कसने की मांग की है. प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार से निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज की दरों को तय करने का आग्रह किया है. इसमें देरी पर पार्टी द्वारा आंदोलन की चेतावनी दी है.
अस्पतालों को सुप्रीम कोर्ट का डर नहीं
भाजपा के मुताबिक 14 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी किया था. इसमें कोरोना इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर नकेल कसने को कहा गया था. स्वास्थ्य राज्य का विषय होता है. इसीलिए अस्पतालों में रेट तय करना राज्य की जिम्मेदारी है. कोर्ट के आदेश के बावजूद कुछ निजी अस्पताल मरीजों को लूट रहे हैं. उनके कारण सिस्टम बदनाम हो रहा है. हालांकि आज भी कई डॉक्टर और हॉस्पिटल कोरोना वारियर के रूप में मरीजों की सेवा कर रहे हैं.
सरकार करे पावर का उपयोग
पूरे देश में महामारी अधिनियम लागू है. राज्य सरकार और अधिकारियों को जनहित में काम करने को विशेष पावर दिया गया है. झारखण्ड के पड़ोसी राज्यों ने निजी अस्पतालों में कोरोना इलाज की दरों को तय कर दिया है. राज्य सरकार को ऐसी ही व्यवस्था यहां भी करना चाहिये. कोरोना के इलाज की दरों को जल्दी से तय किये जाने से अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगेगी.




