
Ranchi: स्वयं सहायता समूह के द्वारा पलाश ब्रांड से संबंधित उत्पादों को जी.आई.आई टैग प्रमाणीकरण दिलाने के लिए प्रयास शुरू किये गये हैं. मुख्य सचिव के निर्देश पर ग्रामीण विकास विभाग व जेएसएलपीएस ने पलाश मार्ट के उत्पादों को जी.आई. टैग दिलाने के लिए चिंहित किया है. नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटि से इस संबंध में विमर्श किया गया है और उनके सुझावों के बाद पपीता, लाह, चिरौंजी, जीरा फुल, चावल, मडुवा, आटा, तसर सिल्क, डोखरा आदि का चयन किया गया है. संस्था के अनुसार किसी भी स्थानीय उत्पादों का जीआई टैगिंग उस उत्पाद के स्थानीय होने के संबंध में राष्ट्रीय अथवा अभिलेखागार में गहन शोध कर Histrorical Authentic Evidence के आधार पर ही उत्पादों का जीआई टैगिंग के लिए चयन किया जाना श्रेयस्कर होगा. अधिकारियों ने बताया कि उपरोक्त संस्था द्वारा प्रस्तावित बजट एवं प्रक्रिया की जटिलता को दृष्टिगत रखते हुए जेएसएलपीएस के द्वारा बिहार राज्य की समकक्ष संस्था जीविका बिहार एसआरएलएम के द्वारा स्थानीय उत्पाद मखाना के लिए प्राप्त जीआई टैगिंग प्रक्रिया एवं लागत को समझने के लिए संपर्क किया गया है. जीविका बिहार के द्वारा मखाना उत्पाद की जीआई कराने की प्रक्रिया को उद्वोग विभाग, बिहार सरकार के द्वारा कार्यान्वित किए जाने की जानकारी उपलब्ध करायी गयी. जेएसएलपीएस के द्वारा उद्वोग विभाग सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर योग्य पलाश उत्पादों के जीआई टैग निबंधन औपचारिक प्रक्रिया आरंभ किए जाने का निर्णय लिया गया है. इसी संबंध में जेएसएलपीएस के राज्य स्तरीय पदाधिकारियों का उद्वोग विभाग बिहार सरकार के साथ बैठक और वहां का भ्रमण करके इस दिशा में कार्य किया जायेगा.
33.55 लाख रुपये खर्च की योजना
पलाश ब्रांड उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए 33.55 लाख रुपये प्रस्तावित खर्च होने की संभावना है. नेशनल लॉ विवि बैंगलुरू के सुझाव पर इसके वित्तीय एवं तकनीकी प्रतिवेदन तैयार किया गया है. जिस तरह से सोहराइर पेंटिंग को जीआई टैग कराने की प्रक्रिया अपनायी गयी है उसका भी अवलोकन किया जा रहा है.




