
Ranchi : गरीब कल्याण अन्न योजना और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलनेवाले मुफ्त अनाज की व्यवस्था सरकार को फिर से बहाल करनी चाहिए. ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भूख के मामले में भारत की स्थिति को बहुत गंभीर बताया है. जो कहीं न कहीं केंद्र सरकार की योजनाओं का पोल खोलती है. ये बातें सीपीआइएम राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहीं. श्री विप्लव ने ये बातें बयान जारी कर कहीं. उन्होंने कहा कि साल 2023 में देश के लगभग दो-तिहाई लोगों के लिए 2013 के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त राशन की घोषणा करना, इस बात की स्वीकारोक्ति है कि भूख का भूत देश के करोड़ों लोगों को सता रहा है. जिसे अन्यथा दूर नहीं किया जा सकता है. खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को मिला कर 81.35 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज मुफ्त मुहैया कराया जायेगा. वहीं अब इन लोगों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा बाजरा से वंचित कर दिया जायेगा. जो खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिल रहा था. नतीजतन 5 किलो सब्सिडी वाले खाद्यान्न की भरपाई के लिए, जो पोषण के स्तर को बनाये रखने के लिए बहुत जरूरी है, लोगों को खुले बाजार में जाना होगा. जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे करोड़ों परिवारों के खिलाफ एक क्रूर कदम होगा. नयी व्यवस्था के तहत 5 किलो चावल के लिए उन्हें अब 15 रुपये के बजाय 200 रुपये, और गेंहू के लिए 10 रुपये के बजाय 150 रुपये तक देने होंगे. श्री प्रकाश ने मांग कि की सरकार इस पर विचार करे.
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