
Ranchi: आने वाले कुछ महीनों में बीसीसीएल को झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ प्रमुख कोल ब्लॉक मिलने की संभावना है. इस मामले में कोल इंडिया ने बीसीसीएल और कोयला मंत्रालय के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है. इन प्रोजेक्ट्स में विशेष फोकस कोकिंग कोल के उत्पादन को बढ़ाना है. जिससे देश के अपने खदानों से कोकिंग कोल पर निर्भरता बढ़ सकें.
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कोल इंडिया के अधिकारियों की वार्ता इस संबध में बीसीसीएल अधिकारियों के साथ हुई है. जिसमें बताया गया है कि बीसीसीएल को जल्द ही कल्याणेश्वरी कोल ब्लॉक पर खनन की अनुमति मिलेगी. यह कोल ब्लॉक पश्चिम बंगाल में स्थित है. इस प्रोजेक्ट में काफी कोकिंग कोल का भंडार होने की बात कही गयी है. वहीं, सीतारामपुर की खदान मिलने की बात भी कही गयी है. क्योंकि दोनों ही कोल ब्लॉक समीप है और डंपिंग के लिये क्षेत्र की कमी है. ऐसे में दोनों कोल ब्लॉक मिलने से कोयला उत्पादन में वृद्धि होगी.
सीतारामपुर कोल ब्लॉक मिलने से क्षेत्रफल में वृद्धि होगी. सिर्फ कल्याणेश्वरी की खदान से करीब 305 मिलियन टन से अधिक कोकिंग कोल निकल जाएगा. साथ ही क्षेत्र की समस्या का भी समाधान होगा. जबकि राज्य के गोविंदपुर, करमपदा समेत अन्य कोल ब्लॉक को विस्तार देने और नये कोल ब्लॉक आवंटन पर काम किया जा रहा है. इसके लिये कुछ क्षेत्रों का सर्वे भी कुछ समय पहले किया गया था.
कोयला उत्पादन बढ़ाना है लक्ष्य
कोल इंडिया की ओर से बीसीसीएल से कोयला उत्पादन पर विशेष बल दिया जा रहा है. कंपनी मुख्य रूप से कोकिंग कोल का उत्पादन करती है. ऐसे में बीसीसीएल को आने वाले पांच साल में सौ मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए कोयला मंत्रालय की ओर से कहा गया है. बीसीसीएल को मौजूदा समय में 41 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य मिला है. बीसीसीएल ने पिछले दिनों संथाल परगना में मिले दो कोल ब्लॉक को वापस कर दिया है. इसमें संथाल के पीरपैंती और धुनियानार्थ कोल ब्लॉक में जी 12 ग्रेड का कोयला मिला था. जिसके कारण कंपनी ने ब्लॉक वापस कर दिया. जबकि भागलपुर से भी कोल ब्लॉक को वापस कर दिया गया है.




