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मणिपुर प्रकरण पर कांग्रेस विधायक दीपिका पांडे ने पीएम पर बोला हमला, कहा- केंद्र सरकार और गुप्तचर एजेंसियां रहीं फेल

Ranchi: मणिपुर में कुकी समुदाय की आदिवासी महिलाओं के साथ हुई अमानवीय घटना के विरोध में रविवार को कांग्रेस विधायक दीपिका पांडे केंद्र सरकार पर जमकर बरसीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ गुप्तचर एजेंसियों पर भी सवाल उठायी. पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि जो कुछ मणिपुर में हुआ है, उससे वीभत्स कुछ नहीं हो सकता. पूरा देश का सर झुकाने वाला, पूर्वात्तर जल रहा है. लेकिन प्रधानमंत्री जी मणिपुर के लिए समय नहीं निकाल पाए या उनको ऐसा लगता होगा कि मणिपुर में घट रही घटनाएं इतनी महत्वपूर्ण नहीं है. मौके पर प्रदेश कांग्रेस सेवादल की अध्यक्ष नेली नाथन, सुन्दरी तिर्की, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ कुमार राजा उपस्थित थे.

उन्होंने कहा कि हर महिला का सम्मान बराबर हो, लेकिन जब वो महिला किसी भारतीय सेना के उस जवान के साथ हो, जिसने कारगिल की रक्षा की हो, जिसने श्रीलंका में जाकर भारत का मान बढ़ाया हो तो उस महिला के प्रति अगर हृदय में भाव है और उसकी एक लाईन जो मुझे चुभ गई, पीड़ा दे गई कि मैंने कारगिल तो बचा लिया, पर अपनी पत्नी, अपने बच्चे, अपना गांव नहीं बचा पाया, ये बात बहुत दूर तक छूती है.

उन्होंने कहा कि विदेशों में प्रधानमंत्री भाषण बड़ी-बड़ी देते हैं पर मणिपुर के लिए दो शब्द नहीं थे उनके पास, जब सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया तब प्रधानमंत्री जी बेवशी में मीडिया से मुखातिब हुए. मणिपुर पर कम राजस्थान और छतीसगढ़ पर भाषण देकर इस तरही घटना पर भी राजनीतिकरण करने का काम किया. कम से कम अपील ही कर लेते शान्ति स्थापित होना चाहिए. हमें गर्व है अपने नेता राहुल गांधी पर. तमाम व्यवधान के बीच वो गए और उनको हर समुदाय ने गले से लगाया, उन्हें रोकने की कोशिश सरकार की ओर से हुई किन्तु न वो रूके ना वो झुके और ना डरे.

उन्होंने देश की गुप्त एजेंसियों पर भी सवाल उठाया. कहा कि उनकी गुप्त एजेंसियां क्या कर रही थी. विपक्ष के विधायकों को डराने के लिए भाजपा में सम्मिलित कराने के लिए जो तत्परता दिखाती है वो तत्परता मणिपुर में कहां चली गई. जबकि महिला आयोग, मणिपुर की राज्यपाल तक चिंता व्यक्त कर चुकी लेकिन मणिपुर की हिंसा नहीं रूकी. यूपीए सरकार में थोडी से पेट्रोल और गैस की कीमत बढ़ने पर गैस का सिलेडंर माथे पर रखकर सड़कों पर आंदोलन करने वाली महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी खामोश क्यों हैं. क्या उन्हें भी बोलने का आदेश नहीं जो स्वंय एक महिला हैं. अगर आप महिला होकर भी एक महिला पर इस तरह की घटना की निंदा नहीं कर सकते तो आपको अविलंब इस्तीफा देना चाहिए.

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