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बीमार उद्यमों की नीलामी प्रक्रिया में छोटे निवेशकों का ध्यान रखना जरुरी : महेश पोद्दार

Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने सरकार को बीमार उद्यमों को पुनर्जीवित करने और एनपीए हो चुके बैंक लोन्स के मामले निपटाने के दौरान छोटे निवेशकों के हितों का ध्यान रखने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि एनपीए हो चुके कर्जों के मामले में कुछ कर्जदार बेशक विलफुल डिफॉल्टर्स होते हैं, लेकिन कई परिस्थितियों की वजह से भी असफल होते हैं. सरकार को एनपीए लोन्स के निपटारे के वक्त वैसे ईमानदार उद्यमियों के हितों का ध्यान रखना चाहिए.

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राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार शुक्रवार को सरकार द्वारा संसद में पेश इंसोलवेन्सी एंड बैंकरप्सी कोड (द्वितीय संशोधन) बिल, 2018 पर हो रही चर्चा में भाजपा की ओर से हिस्सा ले रहे थे. यह विधेयक इंसोलवेन्सी और बैंकरप्सी कोड अध्यादेश की जगह लेगा, जो 6 जून 2018 को जारी किया गया है.

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भारत में बैंक खाता नहीं रखने वाले विदेशी निवेशकों को मिलेगी राहत

महेश पोद्दार ने कहा कि माननीय वित्त मंत्री ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि बैंकों को संपत्ति का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो और मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा हो. उन्होंने कहा कि इस संशोधन से वैसे विदेशी निवेशकों को राहत मिलेगी जिनके पास देश में बैंक खाता नहीं है और इस वजह से जिन्हें संबंधित वित्तीय संस्थानों से प्रमाणपत्र प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था. विधेयक में निपटारे के प्रस्तावों को मंजूरी के लिए मतदान का प्रतिशत पूर्व निर्धारित 75 प्रतिशत से घटाकर 66 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका श्री पोद्दार ने स्वागत किया और कहा कि इससे प्रस्तावों के निपटारे में विलम्ब नहीं होगा.

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‘पुराना मालिक भी घाटे में चल रही कंपनियों को पुनर्जीवित कर सकता है’

एमएसएमई सेक्टर की चर्चा करते हुए सांसद महेश पोद्दार ने अपने निजी अनुभव भी साझा किये. उन्होंने कहा कि बीमार हो चुकी एमएसएमई यूनिट को वही प्रोमोटर पुनर्जीवित कर सकता है जो उसे चलाता रहा है. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि बीमार होने के बावजूद एमएसएमई के प्रोमोटर को डिबार नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे भी नीलामी प्रक्रिया में शामिल होने का मौक़ा मिलेगा.

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