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रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स चुकाने को बाध्य नहीं हैं ग्राहक, जबरन लिये जाने पर जा सकते हैं उपभोक्ता फोरम

राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के सवाल पर सरकार ने दी जानकारी

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Ranchi: यदि आप किसी होटल, रेस्टोरेंट या पब में भोजन करते हैं तो आप खाने के बिल के साथ सर्विस चार्ज अर्थात सेवा प्रभार चुकाने को बाध्य नहीं हैं. सरकार ने होटलों और रेस्तराओं द्वारा खाद्य बिलों पर उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे सेवा प्रभार के सम्बन्ध में अप्रैल 2017 में ही दिशा–निर्देश जारी कर दिए हैं. इन दिशा निर्देशों के अनुसार ग्राहक को दिए गए बिल पर स्पष्ट रूप से यह उल्लेख होना चाहिए कि सेवा प्रभार स्वैच्छिक है, और भुगतान करने से पूर्व बिल के सेवा प्रभार कॉलम को ग्राहक द्वारा भरने के लिए खाली छोड़ दिया जाय. शुक्रवार को राज्यसभा में सांसद श्री महेश पोद्दार के एक प्रश्न पर केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री श्री सी. आर. चौधरी ने यह जानकारी दी.

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जबरन सर्विस टैक्स लिए जाने पर ग्राहक हैं मुआवजे के हकदार

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मंत्री सी. आर. चौधरी ने बताया कि कोई भी ग्राहक सेवा प्रभार के मामले में अनुचित भुगतान लिए जाने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत सुनवाई किये जाने तथा मुआवजे के लिए उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है. उन्होंने बताया कि सरकार ने संसद में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 पेश किया है, जिसमें केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण नामक एक कार्यकारी एजेंसी की स्थापना का प्रावधान भी किया है. प्राधिकरण उपभोक्ताओं से किये गए इस प्रकार के अनुचित व्यवहारों से निपटने की कार्रवाई में सक्षम होगा.

झारखंड में जबरन सर्विस टैक्स लिए जाने पर जागरुकता की कमी, मात्र तीन शिकायतें दर्ज
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एक साल में झारखंड में दर्ज की गई मात्र तीन शिकायतें

केन्द्रीय मंत्री ने सदन में अप्रैल 2017 से जून 2018 तक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का ब्यौरा भी रखा. सदन को उपलब्ध कराई गयी जानकारी के मुताबिक़ इस अवधि में सबसे ज्यादा 206 शिकायतें दिल्ली से प्राप्त हुई, जबकि 175 शिकायतों के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है|झारखण्ड से इस अवधि में मात्र 3 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

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