
Jamshedpur: टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के चुनाव के बाद भी यूनियन की गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही. यूनियन महामंत्री सुमित पॉल द्वारा बुधवार को बुलाई गई पहली कमेटी मीटिंग में कई कमेटी मेंबर्स नहीं आए. बताया जा रहा है कि नाराज और असन्तुष्ट चल रहे कमेटी मेंबर्स, पुरानी टीम के हैं, जिन्हें नई टीम में न तो जगह मिली है और न ही सम्मान मिला है. इस बारे में पूछे जाने पर नये अध्यक्ष दिप्तेन्दू चक्रवर्ती ने कहा कि बुधवार को कोई आधिकारिक बैठक नहीं थी. केवल मिलने-जुलने और चाय-नाश्ता के लिए बैठक बुलाई गई थी, ताकि सारे कमेटी मेंबरों का आपस में बेहतर तालमेल हो और हम एकता के साथ आगे बढ़े सके.
बकौल चक्रवर्ती, हमारी कोशिश है कि संगठन में एकजुटता रहे. हम विवाद को खत्म करने के लिए सभी नेताओं के साथ मिलेंगे और उनका समर्थन भी मांगेंगे. पिछले चार साल से आपसी गुटबाजी की शिकार इस यूनियन के सामने अपने कमेटी मेंबरों को एकजुट रखने के साथ ही अनूप सिंह को भी साथ में लेकर चलने की बड़ी चुनौती होगी.
नई टीम के सामने क्या है चुनौती
1.आपसी एकजुटता-नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी एकता को बरकरार रखने की होगी. अगर नई टीम अपने पुराने साथियों और सीनियर नेताओं को साथ लेकर नहीं चली तो यूनियन में स्थायित्व नहीं होगा. प्रबंधन हावी होगा और वह जो समझौता कराना चाहेगा, कर लेगा.
2.अनूप सिंह को मनाना-नई टीम के साथ ही प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनूप सिंह को मनाना रहेगा. अनूप सिंह ने साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव को नहीं मानते हैं और पुरानी टीम ही बरकरार रहेगी. ऐसे में विदेश दौरे से लौटने पर अनूप सिंह पर सबकी नजर होगी. अगर वह चुप हो गये, तो संदेश जाएगा कि उन्होंने प्रबंधन के साथ सेटिंग कर लिया है और अगर विरोध का रास्ता अपनाया तो नई टीम के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा.
3.बेहतर ग्रेड कराने की चुनौती-नई टीम के सामने बेहतर ग्रेड कराने की चुनौती होगी. अगर नई, टीम टाटा मोटर्स से बेहतर समझौता नहीं करा पाई तो कर्मचारी भी इस यूनियन के विरूद्ध हो जाएंगे. ऐसे में यूनियन के नेतृत्व पर सवाल उठना शुरू हो जाएगा.




