
Ranchi : वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव एल खियांगते (Lalbiaktlunga Khiangte) ने कहा कि “राज्य में समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि हम संसाधन कुशल, सततशील तथा न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढें. श्री खियांगते बुधवार को झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (जेएसपीसीबी) और सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा संयुक्त रूप से एक राज्य स्तरीय कांफ्रेंस ‘कार्बन बजटिंग एंड न्यूट्रैलिटी इन झारखंड : वे-फॉरवर्ड फॉर इंडस्ट्रीज’ को सम्बोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों के साथ आर्थिक विकास के लक्ष्यों को इस प्रकार समायोजित करने की जरूरत है कि हम विकास की आवश्यकताओं, डीकार्बनाइजेशन प्रक्रिया और शून्य कार्बन उत्सर्जन के पारस्परिक संबंधों से जुड़े समाधान पर अमल करें.
श्री खिंयागते ने कहा कि देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कोयला, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, पेट्रोकेमिकल और कृषि का योगदान करीब 96 प्रतिशत है. झारखंड के क्लाइमेट एक्शन प्लान (2014) के अनुसार राज्य में भारी उद्योग के कारण ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन औसत से अधिक है.
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एक सक्षम क्लाइमेट गवर्नेंस की जरूरत: रमापति
इस अवसर पर सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि “नेट जीरो टारगेट में इंडस्ट्रीज और बिज़नेस सेक्टर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने और भावी रोडमैप तैयार करने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ली गयी. यह पहल सराहनीय है.
एक सक्षम क्लाइमेट गवर्नेंस की जरूरत है, जो विभिन्न विभागों तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स जैसे उद्योग जगत, व्यावसायिक समूह, थिंकटैंक, अकादमिक जगत तथा सिविल सोसाइटी के बीच कन्वर्जेन्स मॉडल पर समन्वय स्थापित कर सके, ताकि झारखंड सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सके.
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ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिकाधिक निवेश की जरूरत : राहुल शर्मा
राज्य में कार्बन न्यूट्रल इकॉनोमी के लिए बेहतर योजना और वित्तीय तंत्र पर जोर देते हुए झारखंड सरकार में योजना एवं विकास विभाग के सचिव राहुल शर्मा (आईएएस) ने कहा कि “कार्बन मुक्त अर्थव्यवस्था के लिए क्लाइमेट फाइनेंसिंग मुख्य प्रेरक शक्ति होगा.
इसमें राज्य के सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों तथा प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. क्योंकि इसके लिए दूरदर्शी योजना, सक्षम तकनीकी परिवेश और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिकाधिक निवेश की जरूरत होगी.
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पहले सत्र में कार्बन बजटिंग पर हुई चर्चा
सम्मेलन के पहले सत्र में कार्बन बजटिंग के राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय दृष्टिकोण और राज्य में उसकी प्रासंगिकता पर पर चर्चा की गयी. दूसरे और तीसरे सत्र में इंडस्ट्रीज एवं बिज़नेस सेक्टर्स में कार्बन न्यूट्रैलिटी के परिप्रेक्ष्य में इनोवेटिव टेक्नोलॉजी, फाइनैंसिंग, और इकोलॉजिकल कंज़र्वेशन पर बात हुई, जिसमें कोयला, ऊर्जा, स्टील, केमिकल तथा सीमेन्ट उद्योग की भूमिका को रेखांकित किया गया. चौथे सत्र में कार्बन न्यूट्रैलिटी को प्राप्त करने के लिए संभावित रोडमैप और नीति-रूपरेखा की पहचान की गयी.
नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सस्टनेबल ट्रांजिशन जरुरी : एके रस्तोगी
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एके रस्तोगी (आईएफएस) ने कहा कि “केंद्र सरकार द्वारा तय वर्ष 2070 में नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सस्टनेबल ट्रांजिशन आवश्यक है. इस दिशा में उद्योग-व्यापार जगत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक विकास में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है.
श्री रस्तोगी ने आगे कहा कि “भावी नीतियों एवं कार्यक्रम के निर्माण के केंद्र में पर्यावरण संरक्षण के साथ कमजोर तबकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी. ताकि सततशील विकास को गति दी जा सके.
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इनकी रही उपस्थिति
सम्मलेन के विभिन्न सत्रों में डॉ सीके आसनानी, सीएमडी, यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल), श्री अमरेंदु प्रकाश, निदेशक-प्रभारी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), श्री पीएम प्रसाद, सीएमडी, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), श्री समीरन दत्ता, सीएमडी, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), श्री संजीव कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के अलावा सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग जगत व कॉरपोरेट घरानों के आला अधिकारी उपस्थित रहे.
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