
Ranchi : पूरे देश भर में बाघों की गिनती का पहला चरण शुरू हो गया है. वन विभाग के अधिकारी पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बाघ की खोज में जुट गए हैं. बाघों की खोज लातेहार लोहरदगा सीमा पर की जा रही है. दरअसल एक सप्ताह पहले लातेहार के रिचुघुटा में इलाके में एक व्यक्ति ने बाघ देखने का दावा किया था. जिसके बाद लातेहार वन विभाग और पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारी सक्रिय हो गए. रिचुघुटा के इलाके में पलामू टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं.
इसे भी पढ़ें : तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद IIT-ISM धनबाद का क्रेज बरकरार, सीएस ब्रांच में एडमिशन के लिए 84 स्टूडेंट्स कर रहे इंतजार
100 से अधिक ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं
पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक कुमार आशुतोष ने बताया कि व्यक्ति ने बाघ को काफी नजदीक से देखा है, पीटीआर के अधिकारी मौके का जायजा ले चुके हैं. पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक ने बताया कि बाघों की खोज के लिए ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं, ट्रैकिंग कैमरे के माध्यम से इलाके में निगरानी रखी जा रही है. 100 से अधिक ट्रैकिंग कैमरे इलाके में लगाए गए हैं.
2018 के जनगणना में बाघों की संख्या शून्य थी
अधिकारियों को अंदेशा है कि पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके का ही बाघ लातेहार और लोहरदगा सीमा पर देखा जा रहा है. पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में फरवरी 2020 के बाद से बाघ नहीं देखा गया है. पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क के इलाके में फरवरी 2020 में एक मृत बाघिन मिली थी. उसके बाद से पीटीआर के 1029 वर्ग किलोमीटर में बाघ नजर नहीं आया है. बाघों की गिनती के लिए जनगणना की जा रही है. 2018 के जनगणना में भी पलामू टाइगर रिजर्व किला में बाघों की संख्या शून्य बताई गई थी. 2020 में पीटीआर के इलाके में एक बाघिन मृत मिली थी.
इसे भी पढ़ें : Big News: एक अप्रैल से DRDA का अस्तित्व खत्म, आदेश जारी, दावा-नहीं जायेगी किसी की नौकरी




