
आनंद कुमार
Jamshedpur : जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किये जा सकते हैं. नयी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों ने बताया कि मोदी मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में झारखंड से तीसरे मंत्री के रूप में विद्युत महतो की इंट्री हो सकती है. यदि ऐसा हुआ, तो जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा और शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी के बाद विद्युत मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होनेवाले झारखंड के तीसरे सांसद होंगे. झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं, जिनमें 11 सीटों पर भाजपा, एक सीट पर भाजपा की सहयोगी आजसू और एक-एक सीट पर झामुमो और कांग्रेस का कब्जा है. सूत्र ने बताया कि विद्युत महतो को राज्यमंत्री के तौर पर मोदी कैबिनेट में शामिल किया जायेगा.
आदिवासी के बाद अब कुर्मी वोटों पर है नजर
द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी वोट बैंक अपनी तरफ करने की कवायद के बाद विद्युत के जरिये भाजपा राज्य में मूलवासियों को अपनी तरफ करने की कवायद में जुटी है. राज्य में कुर्मी और तेली साहू (वैश्य) मूलवासियों की काफी अच्छी तादाद है. ये दोनों पिछड़ी जाति से आते हैं, लेकिन जातीय रूप से ये दोनों जातियां बेहद संगठित और राजनीतिक रूप से काफी ज्यादा जागरूक हैं. दरअसल पिछले जून माह में संपन्न राज्यसभा चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखंड जदयू के अध्यक्ष खीरू महतो को बिहार से प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया था. झारखंड में लोकसभा और विधानसभा की कई सीटों पर कुरमी समाज निर्णायक भूमिका में हैं. नीतीश ने झारखंड के कुरमी नेता को बिहार से प्रत्याशी बनाकर झारखंड के कुर्मियों को साधने और अपना खोया जनाधार हासिल करने का प्रयास किया है. भाजपा का मानना है कि विद्युत महतो को केंद्र में मंत्री बनाने से राज्य में राजनीतिक दृष्टि से ताकतवर कुर्मी समाज को अपने पाले में किया जा सकेगा. अभी कुर्मी समाज राजनीतिक रूप से झामुमो, आजसू और भाजपा के बीच बंटा है. शैलेंद्र महतो, आभा महतो और रामटहल चौधरी के बाद भाजपा के पास कोई बड़ा कुर्मी नेता नहीं है, जो इस समाज को भाजपा से जोड़े. विद्युत के जरिये इस कमी को पूरा किया जा सकता है. बता दें कि मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार 7 जुलाई 2021 को हुआ था. संभावना जतायी जा रही है कि त्योहारी मौसम बीतने के बाद अक्तूबर-नवंबर में मोदी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार हो सकता है.
झारखंड में वैश्य, बिहार में अति पिछड़ा को मिल सकती है कमान
इसी तरह कार्यकाल पूरा कर चुके झारखंड और बिहार के भाजपा अध्यक्षों के स्थान पर नये अध्यक्षों की नियुक्ति भी अक्तूबर में होने की संभावना है. इसका कारण यह बताया जा रहा है कि भादो का मौसम खत्म होने के बाद पितृ पक्ष आरंभ हो जायेगा और फिर शारदीय नवरात्र, दशहरा-दिवाली-छठ जैसे बड़े त्योहार आ जायेंगे. इसलिए अक्तूबर के आखिर या नवंबर माह में नये अध्यक्ष की घोषणा किये जाने की संभावना है. बिहार में अति पिछड़ा वर्ग से आनेवाले किसी नेता को कमान दी जा सकती है, जबकि भाजपा में वैश्य समुदाय के नेता को अध्यक्ष पद दिये जाने की चर्चा है. फिलहाल राकेश प्रसाद और आदित्य साहू के नाम सबसे आगे चल रहे हैं.
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