
Ranchi: जमीन मुआवजा को लेकर मांगर मियां की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान डीसी, चतरा झारखंड हाई कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने चतरा, डीसी की दलीलों को सुनकर अवमानना याचिका को ड्रॉप कर दिया. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पैरवी की. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि 3 सदस्य वाली कमेटी ने प्रार्थी को रैयती की मान्यता नहीं देते हुए उनके मुआवजा के क्लेम को खारिज कर दिया है. दरअसल, राज्य सरकार ने एक जमीन को सरकारी जमीन मानते हुए उसे ईस्ट सेंट्रल रेलवे को ट्रांसफर कर दिया था. प्रार्थी का दावा था कि वह जमीन 30 साल से ज्यादा समय से उसके नाम पर दर्ज है इसलिए राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के आधार पर उसे जमीन के बदले मुआवजा का भुगतान किया जाए. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रार्थी के रिप्रेजेंटेशन को डिसाइड करें. इसके आलोक में सरकार ने 3 सदस्य वाली कमेटी बनाई थी. कमेटी ने प्रार्थी के क्लेम को रिजेक्ट कर दिया था. जिसके बाद प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी.
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